देहरादून , फरवरी 26 -- उत्तराखंड के चमोली जिला में श्री बदरीनाथ कॉरिडोर डेवलपमेंट वर्क के अंतर्गत हो रहे निर्माण कार्यों के दौरान, आसपास की पारिस्थितिकी एवं इकोसिस्टम के संतुलन को बनाए रखने के संबंध में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) के वैज्ञानिकों ने गुरुवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के समक्ष इसके वैज्ञानिक अध्ययन (स्टडी) का प्रस्तुतीकरण दिया गया।
मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान समय में इस प्रकार के अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पर्वतीय राज्य में विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां-जहां इस प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता होगी, वहां उनका उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने सर्वेक्षण के निष्कर्षों को आवश्यकता अनुसार सत्यापित कराने के भी निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिकों ने श्री बदरीनाथ क्षेत्र में विगत जनवरी में पारिस्थितिकी इको सिस्टम पर आधारित यह अध्ययन किया था। इसी के निष्कर्षों को आज मुख्य सचिव को प्रस्तुत किया गया। यह सर्वेक्षण थर्मल रिमोट सेंसिंग तकनीक एवं जियो-फिजिकल सर्वेक्षण पर आधारित था, जिसके माध्यम से क्षेत्र की संवेदनशीलता, तापीय परिवर्तन तथा भू-भौतिकीय स्थितियों का विश्लेषण किया गया।
इस दौरान, सचिव डीएस गबरियाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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