नैनीताल , दिसंबर 16 -- उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह की नियुक्ति का मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया है। इस मामले को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गयी है।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की अगुवाई वाली पीठ ने इस मामले में केन्द्र सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है।
इस प्रकरण को प्रो. नवीन प्रकाश नौटियाल की ओर से चुनौती दी गयी है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर प्रो. प्रकाश सिंह की नियुक्ति अवैध है। यह केन्द्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 2009 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनियमन, 2014 के प्रावधानों के खिलाफ है।
नियम 7.3 में स्पष्ट कहा गया है कि कुलपति के लिये प्रोफेसर के रूप में 10 वर्ष का अनुभव आवश्यक है। भारतीय लोक प्रकाशन संस्थान (आईआईपीए) में चेयर प्रोफेसर के रूप में अनुभव को विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के समकक्ष नही माना जा सकता है क्योंकि आईआईपीए न तो एक विश्विविद्यालय है और न ही यूजीसी मानदंडों के तहत संचालित कोई संस्था है।
अंत में अदालत ने केन्द्र सरकार और यूजीसी के साथ ही अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई अगले साल 10 फरवरी को होगी।
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