श्रीगंगानगर , जनवरी 12 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर में सोमवार को बार एसोसिएशन के कई वकीलों ने पुलिस की हालिया कार्रवाइयों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन से मुलाकात करके आपत्ति जताई।।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हंसराज तनेजा की अगुवाई में यह प्रतिनिधिमंडल डा दुहन के कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने पुलिस के 'एरिया डोमिनेंस' अभियान, सोशल मीडिया पर कुख्यात बदमाश के प्रोफाइल्स को फॉलो करने वालों पर बिना जांच के छापेमारी और एक वकील को अनावश्यक रूप से परेशान करने पर गहरी नाराजगी जताई।
श्री तनेजा ने बताया कि रविवार को जिले भर में पुलिस ने सुबह-सुबह 'एरिया डोमिनेंस' नाम से एक अभियान चलाया, जिसके तहत कई लोगों को बिना किसी ठोस जांच या सत्यापन के उनके घरों से उठाकर थाने लाया गया। विशेष रूप से घमूडवाली थाना क्षेत्र में रहने वाले बार एसोसिएशन के एक सदस्य वकील को भी पुलिस ने इस अभियान के दौरान उठा लिया। तनेजा ने कहा, "यह पूरी तरह से अनुचित था। पुलिस को पहले व्यक्ति की पृष्ठभूमि और स्थिति की जांच करनी चाहिए थी। हमने पुलिस अधीक्षक से इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।"उल्लेखनीय है कि इस अभियान का मुख्य निशाना बदमाश सरगना लॉरेंस बिश्नोई के करीबी बदमाश विशाल पचार उर्फ बबलू के सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को लाइक, शेयर या फॉलो करने वाले थे। पुलिस ने श्रीगंगानगर में पुरानी आबादी में कई घरों पर छापेमारी की और कई लोगों को थाने लाकर पूछताछ की। कुछ को छोड़ दिया गया, जबकि कुछ के खिलाफ आगे की कार्रवाई की गई। वकीलों का तर्क था कि सोशल मीडिया पर किसी पोस्ट को लाइक या शेयर करना हमेशा दुर्भावनापूर्ण नहीं होता। कई बार परिवार के सदस्य से या अनजाने में ऐसा हो जाता है। उन्होंने जोर दिया कि पुलिस को पहले व्यक्ति की प्रोफाइल और इरादे की गहन जांच करनी चाहिए न कि अंधाधुंध कार्रवाई।
एक अन्य घटना में जवाहरनगर थाना पुलिस द्वारा एक सरकारी अध्यापक को भी सुबह-सुबह घर से उठाकर थाने ले गया। इस घटना की सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गईं, जिसमें पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया गया। पुलिस का दावा था कि अध्यापक के मोबाइल से बदमाश के पेज को लाइक या शेयर किया गया था, इसलिए पूछताछ जरूरी थी, लेकिन स्थानीय लोगों और वकीलों ने कहा कि बिना पूर्व जांच के ऐसी कार्रवाई संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
वकीलों ने जोर देकर कहा कि पुलिस को सोशल मीडिया एक्टिविटी के आधार पर कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जब तक कि स्पष्ट सबूत न हों।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित