श्रीगंगानगर , जनवरी 19 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर में चीनी मांझे की बिक्री पर जिला प्रशासन के लगाये गये सख्त प्रतिबंध के बावजूद, यह घातक सामग्री शहर की छोटी-बड़ी दुकानों पर धड़ल्ले से बेची जा रही है।
पतंगबाजी के मौजूदा समय में प्रशासन की लापरवाही और पुलिस की निष्क्रियता के कारण आम नागरिकों के घायल होने की आशंका रहती है।
कल शाम पुरानी आबादी थाना क्षेत्र में करीब 13 वर्षीय बालक की गर्दन चीनी मांझे से बुरी तरह कट गयी, जिससे उसे गंभीर चोटें आयीं और सात टांके लगाने पड़े।
इस मांझे को कांच की परत चढ़ी हुई मजबूत सिंथेटिक डोर के रूप में जाना जाता है, जो बेहद खतरनाक होती है। यह डोर न केवल पक्षियों और जानवरों के लिए घातक है, बल्कि इंसानों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। जिला प्रशासन ने इसकी बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, लेकिन शहर में दुकानदार बेधड़क इसे बेच रहे हैं। न तो प्रशासनिक अधिकारी दुकानों पर छापेमारी कर रहे हैं और न ही संबंधित थानों की पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है। यह प्रतिबंध सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में बाजार में चीनी मांझा आसानी से उपलब्ध है।
श्रीकरणपुर रोड पर रिद्धि-सिद्धि कॉलोनी-आठ का निवासी सोमेश गुप्ता का करीब 13 वर्षीय पुत्र यश गुप्ता साइकिल पर सुखवंत पैलेस के पास साइकिल से जा रहा था कि शाम करीब पांच बजे हवा में लटक रहा चीनी मांझा अचानक उसकी गर्दन में फंस गया। इसकी तेज धार से उसकी गर्दन के आगे वाले हिस्से में गहरा कट लग गया, जिससे भारी रक्तस्राव होने लगा। यश गंभीर रूप से घायल हो गया और मौके पर ही गिर पड़ा।
उसे तुरंत चिकित्सक के पास ले जाया गया। यह चीनी मांझा इतना तेज और मजबूत होता है कि यह आसानी से मांस को काट सकता है। शहर में पहले भी इस तरह के कई हादसे हो चुके हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी मांझा पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है, क्योंकि यह लंबे समय तक सड़कों और पेड़ों पर लटका रहता है, जिससे पक्षी घायल होते रहते हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंध लागू है, लेकिन संसाधनों की कमी और दुकानदारों की चालाकी के कारण पूरी तरह नियंत्रण मुश्किल हो रहा है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर वह कार्रवाई करेगी।
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