बेंगलुरु , मई 05 -- कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक डी एन जीविराज को बड़ी राहत देते हुए मतपत्र छेड़छाड़ से जुड़ी प्राथमिकी पर रोक लगा दी, हालांकि इसके बावजूद श्रींगेरी पोस्टल बैलेट पुनर्गणना मामले को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

न्यायालय ने इस प्राथमिकी को "प्रेरित मामला" बताया।

न्यायालय ने यह कानूनी राहत ऐसे समय आई है जब मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पुनर्गणना प्रक्रिया में "वोट चोरी" और "आपराधिक साजिश" का आरोप लगाया। मामला अब केवल श्रींगेरी सीट तक सीमित न रहकर चुनावी विश्वसनीयता, सीलबंद मतपत्रों की सुरक्षा और न्यायालय के निर्देश पर हुई पुनर्गणना की प्रक्रिया पर व्यापक राजनीतिक टकराव में बदल गया है।

विवाद की शुरुआत 2023 के विधानसभा चुनाव से हुई, जब कांग्रेस के टी डी राजेगौड़ा को 201 मतों से विजेता घोषित किया गया था। जीविराज की चुनाव याचिका पर उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2026 में खारिज किए गए 279 पोस्टल बैलेट की पुनः जांच का आदेश दिया।

पुनर्गणना के बाद तीन मई 2026 को रिटर्निंग अधिकारी ने परिणाम संशोधित करते हुए जीविराज को 52 मतों से विजेता घोषित कर दिया। इसके कुछ ही घंटों बाद मतपत्रों से छेड़छाड़ के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई, जिससे मामला कानूनी विवाद में बदल गया।

प्राथमिकी के खिलाफ जीविराज की याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने इसकी कार्यवाही पर रोक लगा दी और इसके समय तथा आधार पर सवाल उठाए। न्यायालय ने कहा कि चुनाव संबंधी विवादों का समाधान चुनाव याचिका के माध्यम से होना चाहिए, न कि आपराधिक कार्यवाही के जरिए।

पीठ ने यह भी पूछा कि रिटर्निंग अधिकारी को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया और जांच शुरू करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए।

इसी बीच मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने आरोप लगाया कि पुनर्गणना प्रक्रिया ही संदिग्ध है। उन्होंने कहा, "यह केवल वोट चोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र के साथ संगठित छेड़छाड़ है।" उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो मतपत्र पहले वैध माने गए थे, वे पुनर्गणना के दौरान अचानक अमान्य कैसे हो गए और सीलबंद चुनाव सामग्री में छेड़छाड़ की आशंका जताई।

उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने इसे "भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे बड़ी आपराधिक साजिश" बताते हुए रिकॉर्ड रूम में मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेताओं ने मजबूत कमरों (स्ट्रॉन्ग रूम) और सील की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए मतपत्रों और भंडारण रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की मांग की है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित