नयी दिल्ली , अप्रैल 06 -- उच्चतम न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेकों को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपते हुए प्रारंभिक जांच के आदेश दिए हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने सोमवार को सुनवाई में सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत ने कहा कि जांच एक जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि को कवर करेगी, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर एजेंसी इससे बाहर के लेन-देन की भी जांच कर सकती है।
उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को 16 सप्ताह के भीतर जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को जांच में पूरा सहयोग करने और संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखने को कहा गया है। मुख्य सचिव को समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है।
यह आदेश 'सेव मोन रीजन फेडरेशन' नामक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिजनों और करीबी सहयोगियों से जुड़े फर्मों को बड़े पैमाने पर सरकारी ठेके दिए गए।
याचिका में दावा किया गया कि ये ठेके मुख्यमंत्री की जानकारी और समर्थन से दिए गए, जो पद के दुरुपयोग और हितों के टकराव का संकेत है। इससे पहले मार्च 2025 में अदालत ने इन आरोपों पर केन्द्र के वित्त और गृह मंत्रालयों से जवाब मांगा था। मामले की अगली सुनवाई सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट दाखिल होने के बाद होगी।
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