रायपुर, दिसंबर 14 -- जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान और राज्यगीत से न होने पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने रविवार को कहा कियह राज्य की गौरवशाली परंपरा, संवैधानिक मर्यादा और छत्तीसगढ़ की अस्मिता का अपमान है। उन्होंने कहा कि यह दिन छत्तीसगढ़ के लोकतांत्रिक इतिहास के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि विधानसभा जैसी सर्वोच्च संस्था में राज्य के गौरव पर एक साथ दो आघात किए गए हैं।
पूर्व विधायक एवं छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने सोशल साइट्स (फेसबुक/एक्स) के जरिए कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में पहली बार सदन की कार्यवाही न तो राष्ट्रगान 'जन गण मन' से और न ही राज्यगीत 'अरपा पैरी के धार' से शुरू हुई। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और राज्य की सांस्कृतिक पहचान की उपेक्षा है। उन्होंने याद दिलाया कि 1 नवंबर 2000 को नवगठित छत्तीसगढ़ राज्य की पहली विधानसभा की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई थी, जो आज तक चली आ रही एक गौरवशाली और सम्मानजनक परंपरा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले विधानसभा भवन से समाज सुधारक और महान विभूति मिनीमाता के नाम को हटाया जाना भी राज्य के महापुरुषों के प्रति अनादर का प्रतीक रहा है। अब राष्ट्रगान और राज्यगीत की अनदेखी कर इस अपमान को और गहरा किया गया है। अमित जोगी ने कहा कि 'अरपा पैरी के धार' केवल एक गीत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की आत्मा, उसकी संस्कृति, संघर्ष और पहचान का प्रतीक है। इसकी उपेक्षा सीधे तौर पर छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान पर चोट है।
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