बेंगलुरु , जनवरी 22 -- केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल के संबोधन में बाधा डालने पर गुरुवार को कांग्रेस पर जोरदार हमला किया और लोकतांत्रिक मानदंडों को नष्ट करने, संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने तथा भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए विधायिका के इस्तेमाल का आरोप लगाया।
श्री चौहान ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कांग्रेस ने महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को भी त्याग दिया है और अब वह पूरी तरह झूठ के सहारे टिकी है। उन्होंने कर्नाटक विधानसभा के दृश्यों को अभूतपूर्व बताते हुए आरोप लगाया कि राज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया गया और संविधान की धज्जियां उड़ायी गयी हैं।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्यपाल के अभिभाषण में झूठे दावे किये गये थे, खासकर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के संबंध में और कहा कि कांग्रेस सरकार ने आक्रामक रुख इसलिए अपनाया, क्योंकि सच बोला जा रहा था। उन्होंने राज्यपाल के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के आचरण को कभी सही नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही, उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की मांग की।
मनरेगा में कथित भ्रष्टाचार से विधानसभा टकराव को जोड़ते हुए श्री चौहान ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार बड़े पैमाने पर अनियमितताओं कर रही है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों और सोशल ऑडिट निष्कर्षों का हवाला देते हुए दावा किया कि योजना के तहत 4.33 लाख से अधिक अनियमितताएं सामने आयी हैं। उनका आरोप था कि यादगीर जैसे जिलों में पुरुषों ने महिलाओं का भेष धरकर अवैध रूप से मनरेगा की मजदूरी हड़पी है और यह एक ऐसा मामला है, जिसने राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।
श्री चौहान ने कहा कि ऑडिट रिपोर्टों पर कार्रवाई करने में राज्य सरकार की विफलता ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे 3,500 से अधिक मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गयी, जिनमें 107 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की जा सकती थी। उन्होंने आगे दावा किया कि लोकपाल की सिफारिश और कैग की रिपोर्टों में सामने आयी राशियों को भी वसूल नहीं किया गया, जो पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने यह आरोप भी लगाया कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए तालाबों से मिट्टी निकालने जैसे काम कागजों पर बार-बार दिखाये गये और एक ही परियोजना को कई बार अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ऐसी लाखों अनियमितताएं हुई हैं, जबकि कांग्रेस केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाती रही है।
उन्होंने कहा कि 2006-07 से 2013-14 के यूपीए काल के दौरान कर्नाटक को लगभग 1,739 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि मोदी सरकार के तहत 48,500 करोड़ रुपये से अधिक जारी किये जा चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी राजग के कार्यकाल में मनरेगा की फंडिंग कांग्रेस शासन के आवंटन से कहीं अधिक रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने भ्रष्टाचार और गबन रोकने के लिए तकनीकी उपयोग, कार्य स्थलों का निर्धारण और पीएम गति शक्ति जैसे प्लेटफार्मों के जरिये बड़े सुधार किये हैं, जिससे फर्जी काम या एक ही परियोजना को बार-बार दिखाना मुश्किल हो गया है। ग्राम सभाओं और ग्राम पंचायतों को काम की योजना बनाने और निर्णय लेने के लिए सशक्त किया गया है, जो उन दावों का खंडन करता है, जिनमें स्थानीय निकायों की शक्तियों में कटौती की बात कही गयी थी।
संशोधित योजना के तहत प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अब तालाब, खेत-तालाब और चेक डैम जैसे जल संरक्षण कार्यों के साथ-साथ सड़क, स्कूल, अस्पताल और आंगनवाड़ी भवन जैसे ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया जायेगा। इसके अलावा सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण और प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान को कम करने वाले ढांचे तैयार करने पर जोर रहेगा। उन्होंने कहा कि पिछड़े क्षेत्रों के साथ-साथ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं, दिव्यांगों और गरीबों को प्राथमिकता दी जायेगी।
श्री चौहान ने कर्नाटक सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कृषि उपज की खरीद में विफलता का दावा किया। उन्होंने कहा कि 2024-25 में तीन लाख मीट्रिक टन तुअर दाल खरीदने की मंजूरी के बावजूद राज्य ने केवल 2.16 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद की। उन्होंने तोतापुरी आमों की खरीद के संबंध में भी इसी तरह के आरोप लगाये और दावा किया कि स्वीकृत मात्रा में पूरी खरीद नहीं की गयी, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।
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