जालौन , फरवरी 13 -- महाशिवरात्रि भगवान शिव की विराट दिव्यता का महापर्व है। जालौन जिले में विद्वानों के अनुसार यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिवत्व प्राप्ति का दुर्लभ अवसर है।
पंडित अंकित शास्त्री ने बताया कि शिवरात्रि को पुरुष और प्रकृति के दिव्य मिलन की रात्रि माना जाता है, जिसे सृष्टि के प्रारंभ का प्रतीक भी कहा गया है। भौतिक बंधनों से मुक्ति पाकर ही मनुष्य शिवत्व को प्राप्त कर सकता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार यह रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का पावन अवसर भी है। दार्शनिक दृष्टि से यह शिव और शक्ति का योग है, जो आसुरी शक्तियों पर विजय का संदेश देता है। शिवलिंग की पूजा मन को विकारों और वासनाओं से मुक्त कर निर्मल बनाने का प्रतीक मानी जाती है। वायुपुराण में 'लिंग' को उस तत्व के रूप में वर्णित किया गया है, जिसमें प्रलयकाल में समस्त सृष्टि लीन हो जाती है और सृष्टिकाल में पुनः प्रकट होती है। शिव पुराण में भी भगवान शिव को प्रलय के पश्चात शेष रहने वाला तत्व बताया गया है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का विशेष प्रभाव रहेगा। पंचांग के अनुसार 15 फरवरी को रात्रि 7:48 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। विद्वानों के अनुसार श्रवण नक्षत्र में किया गया शिव पूजन अत्यंत फलदायी होता है।
चार पहर की पूजा का विशेष महत्व है। प्रथम पहर शाम 6:11 बजे से रात 9:23 बजे तक, द्वितीय पहर 9:23 बजे से 12:35 बजे तक, तृतीय पहर 12:35 बजे से प्रातः 3:47 बजे तक तथा चतुर्थ पहर 3:47 बजे से 6:59 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा करनी चाहिए। पूजन सामग्री में शिवलिंग, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी, शक्कर (पंचामृत), बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, चंदन और भस्म शामिल रखें।
पूजन क्रम में सर्वप्रथम शिवलिंग पर जल अर्पित कर पंचामृत से अभिषेक करें, पुनः जल चढ़ाएं। चंदन से त्रिपुंड बनाकर तीन पत्तियों वाला अखंड बेलपत्र चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखते हुए अर्पित करें। फल, बेर एवं मिठाई का भोग लगाकर घी का दीप प्रज्वलित कर आरती करें।
धार्मिक मान्यता है कि यह रात्रि चंद्रमा के क्षीणतम प्रभाव की होती है, अतः मन को नियंत्रित करने के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। इस दिन की गई शिव साधना ग्रह दोषों, विशेषकर चंद्र, राहु और शनि दोष से राहत प्रदान करती है। शिव आराधना भय और भ्रम को दूर कर आत्मविश्वास बढ़ाती है तथा मोक्ष मार्ग प्रशस्त करती है।
गरुड़ पुराण में वर्णित कथा के अनुसार निषादराज सुंदरसेन ने अनजाने में शिवलिंग का अभिषेक कर रात्रि जागरण किया था, जिसके फलस्वरूप उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ। अग्निपुराण, पद्म पुराण और लिंग पुराण में भी श्रद्धापूर्वक रात्रि जागरण और बेलपत्र अर्पण को मोक्षदायी बताया गया है।
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