चंडीगढ़ , फरवरी 07 -- ) हरियाणा में फरीदाबाद के सूरजकुंड में आयोजित 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में इस वर्ष हरियाणा कारागार विभाग की सुधारात्मक जेल नीति विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रदेश की 18 जेलों के बंदियों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद मेले में प्रदर्शित और बिक्री के लिए रखे गए हैं जो बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाते हैं।

मेले में कारागार विभाग द्वारा स्टॉल नंबर 1130 से 1133, 1135 और 1136 लगाए गए हैं, जहां बंदियों के हुनर से बने विभिन्न उत्पाद उपलब्ध हैं।

इनमें नक्काशीदार लकड़ी का फर्नीचर बढ़ईगिरी के उत्कृष्ट नमूने पेंटिंग जेल बेकरी में बने खाद्य पदार्थ शुद्ध एलोवेरा आधारित हर्बल उत्पाद कढ़ाई-सिलाई टेक्सटाइल तथा दैनिक उपयोग की हस्तनिर्मित वस्तुएं शामिल हैं। इन उत्पादों की कीमत 50 रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक रखी गई है जिन्हें गुणवत्ता और मजबूती के कारण पर्यटक काफी पसंद कर रहे हैं।

गौरतलब है कि हरियाणा के कारागार विभाग द्वारा जेलों में चलाए जा रहे सुधारात्मक कार्यक्रमों के तहत बंदियों को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें। यह पहल न केवल उन्हें अपराध से दूर रखने में सहायक है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का माध्यम भी बन रही है।

शिल्प मेले में पहुंचे पर्यटक इस पहल की सराहना कर रहे हैं। यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को व्यवहारिक रूप में साकार करता नजर आ रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित