चंडीगढ़ , मार्च 30 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने पंजाब सरकार द्वारा बेअदबी के संबंध में बनाए जाने वाले कानून के मामले में छह अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे शिरोमणि कमेटी के मुख्य कार्यालय, तेजा सिंह समुद्री हॉल, श्री अमृतसर में सभी सिख संगठनों की एक बैठक बुलाई है।
शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सोमवार को चंडीगढ़ में कमेटी सदस्यों के साथ बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह एक अत्यंत गंभीर मामला है, जिस पर सामूहिक 'पंथक राय' अनिवार्य है। इसीलिए शिरोमणि कमेटी द्वारा सभी सिख संगठनों, निहंग सिंह दलों, दमदमी टक्साल, सिख संस्थाओं, विद्वानों, सिख जजों और वकीलों, मिशनरी कॉलेजों, सिंह सभाओं, फेडरेशनों और सभी संप्रदायों के प्रमुखों (निर्मले, उदासी, सेवापंथी और कारसेवा वाले महापुरुषों) को इस बैठक के लिए आमंत्रित किया गया है।
एडवोकेट धामी ने स्पष्ट किया कि शिरोमणि कमेटी हमेशा से बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून की पक्षधर रही है ताकि इसका स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामान्य धार्मिक ग्रंथों और श्री गुरु ग्रंथ साहिब में बहुत बड़ा अंतर है। वे 'जागृत जोत' गुरु हैं, जिन्हें गुरु साहिब ने स्वयं गुरुतागद्दी सौंपी थी। अतः उनकी महानता और मर्यादा के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।
धामी ने सवाल उठाया कि पंजाब सरकार द्वारा बनाया गया कानून केवल पंजाब तक सीमित रहेगा। यदि दूसरे राज्यों में बेअदबी की घटना होती है, तो वहां इसे कैसे लागू किया जाएगा? इस पर राष्ट्रीय स्तर पर राय बनाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले 'धार्मिक ग्रंथ अपराध रोकथाम बिल 2025' के लिए एक सेलेक्ट कमेटी बनाई थी। शिरोमणि कमेटी ने कई बार पत्र लिखकर कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे, लेकिन सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया। अब 'जागृत जोत एक्ट 2008' में संशोधन की बात करके नई दुविधा पैदा कर दी गई है।
शिरोमणि कमेटी अध्यक्ष ने सभी जत्थेबंदियों और संप्रदायों से अपील की है कि वे छह अप्रैल की बैठक में जरूर शामिल हों। उन्होंने कहा कि इसके लिए औपचारिक निमंत्रण पत्र भी भेजे जा रहे हैं।
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