जयपुर , जनवरी 13 -- राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा कहा है कि प्रदेश में शिक्षा विभाग ने चुनाव आयोग के बिना अनुमोदन के व्याख्याताओं के तबादले कर दिए जो गैरकानूनी है।

श्री डोटासरा ने मंगलवार को यहां प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा कि परीक्षा के एक महीना शेष रहने के बावजूद बड़े पैमाने पर स्थानान्तरण किए गए है, पहले गत सितम्बर में सात हजार से अधिक प्रधानाचार्यों के स्थानान्तरण किए गए जो उप प्रधानाचार्य से प्रधानाचार्य बन गए वो आठ महीने तक काउंसलिंग के अभाव में पदस्थापन के इंतेजार में बैठे रहे।

उन्होंने कहा कि एक ही स्कूल में तीन-तीन, चार-चार प्रधानाचार्य पदस्थापित है और अब व्याख्याताओं के चुनाव आयोग के आदेशों के बावजूद कि एसआईआर चल रही है इसमें कार्य कर रहे किसी भी कार्मिक का बिना अनुमति के स्थानान्तरण नहीं करें लेकिन साढ़े छह हजार व्याख्याताओं के स्थानान्तरण कर दिए जिसमें से 30-35 प्रतिशत व्याख्याता एसआईआर के कार्य में लगे हुए है। इस सूची का अनुमोदन शिक्षा विभाग को चुनाव आयोग से करवाना चाहिए था लेकिन इजाजत नहीं ली इसलिए यह सूची पूरी तरह से गैरकानूनी है।

श्री डोटासरा ने कहा कि कल व्याख्याताओं की तबादला सूची के विरोध में सोशल मीडिया पर लिखा गया और शिक्षक संघों का प्रदर्शन हुआ तो आज आनन-फानन में सरकार ने नया आदेश जारी किया कि जो कार्मिक एसआईआर के कार्यों में लगे हुए है तो उन्हें वहीं रोका जाए और रिलीव नहीं किया जाए, उनके लिए जारी तबादला आदेश को प्रत्यारित करने का आदेश निकाला गया तथा यदि किसी ने तबादले की अनुपालना में दूसरी जगह ज्वाईन कर लिया है तो उसे भी वापस भेजा जाए।

उन्होंने कहा कि इसमें दो प्रकार की परेशानियां सामने आती है कि जिस व्यक्ति का स्थानान्तरण हो गया है लेकिन एसआईआर के कार्य के कारण प्रत्यारित किया गया है उसे तो वापस अपने पुराने स्थान पर ही रहना होगा किंतु जिस व्यक्ति का उसी स्थान पर अन्यत्र स्थान से तबादला हुआ है वो भी उसी स्थान पर अपनी हाजिरी तबादला आदेश की अनुपालना में देगा ऐसे में एक स्थान पर तो दो कार्मिक कार्य करेंगे लेकिन जो स्थान खाली रह गया अन्य व्यक्ति के उसी स्कूल में ज्वाईन करने से वहां छात्रों को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा क्योंकि मात्र एक महीने पश्चात् छात्रों की परीक्षाएं नियत है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के इस तबादला आदेश के कारण एक स्थान पर तो शिक्षक नहीं रहेंगे और दूसरे स्थान पर जहां एसआईआर में लगे कार्मिक का तबादला आदेश प्रत्यारित हो गया है वहां दो कार्मिक हो जाएंगे। सूची को देख कर लगता है कि 2000 से 2500 कार्मिक डबल हो जाएंगे और इतने ही स्थानों पर पद खाली रहेगा। पहली बार राजस्थान में ऐसा हुआ है कि निजी एवं सरकारी स्कूलों में जो प्रायौगिक परीक्षाएं चल रही है जो वर्तमान में जारी है उसमें सरकारी व्याख्याताओं की ड्यूटी लगी है उनमें एक-एक व्यक्ति को 10-12 स्कूलों का प्रभार दिया गया है। लेकिन इसमें समस्या यह है कि एक व्याख्याता जो साईंस विषय का है वह दो महीनों तक विभिन्न स्कूलों में प्रायौगिक परीक्षाएं करवाता रहेगा।

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