नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से रविवार को पेश केन्द्रीय बजट में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में शिक्षा बजट को बढाया गया है जो सरकार की शिक्षा के प्रति प्राथमिकता को दर्शाता है। श्री प्रधान ने संवाददाता सम्मेलन में आज कहा कि इस बजट में नवजात शिशु से लेकर युवा तक का ध्यान रखा गया है।
उन्होंने कहा कि क्वालिटी, स्कूल शिक्षा, स्किलिंग, नर्चरिंग इनोवेशन, इंटरप्रेन्योरशिप और शोध इस बजट के बड़े संकेत है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे ले जाने के लिए बजट में कई कल्पना की गयी है। उन्होंने कहा कि पिछले साल की तुलना में शिक्षा में बजट बढाया गया है। पिछले बार की तुलना में इस बार बजट 8.27 प्रतिशत अधिक है जो सरकार की शिक्षा के प्रति प्राथमिकता को दर्शाता है।
श्री प्रधान ने कहा कि भारत की लड़कियां विज्ञान, तकनीक और गणित की शिक्षा में दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है। सरकार ने इसमें और गति देने के लिए हर जिले में लड़कियों के लिए एक छात्रावास बनाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों के साथ मिलकर पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप बनाये जायेंगे जिसमें शोध,नवाचार और ज्ञान का एक इकोसिस्टम बनेगा। अर्थ नीति को बढाने के लिए उसे ज्ञान से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत में नए राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान खोले जाने की घोषणा की गयी है। देश से बाहर पढने जाने वाले छात्रों को पहले पांच प्रतिशत टैक्स देना पड़ता था उसे दो प्रतिशत किया गया जिससे छात्रों को देश के बाहर शोध करने के लिए जाना आसान होगा।
उन्होंने कहा कि बजट में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीआरटी) के बजट में चौदह प्रतिशत की बढोत्तरी की गयी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के नालेज आधारित अर्थव्यवस्था को बढाने के लिए यह बजट 21वीं सदी के जरूरतों के हिसाब से बनाया गया है।
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