नैनीताल , अप्रैल 02 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों के विनियमितीकरण के मामले में गुरुवार को कोई ठोस निर्णय नहीं दिया है। अलबत्ता उन्हें सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ में शिक्षामित्र मीना आर्या, गुलशन राजा, रविता समेत अन्य शिक्षामित्रों के मामले पर आज सुनवाई हुई।

याचिकाकर्ताओं की ओर से विनियमितिकरण की मांग करते हुए कहा गया कि वे वर्ष 2005 से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्र के रूप में कार्यरत हैं। उनके पास प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा, स्नातक की डिग्री और टीईटी उत्तीर्ण होने जैसी आवश्यक योग्यताएं हैं। उन्हें विनियमितिकरण का लाभ दिया जाए।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि इनकी नियुक्ति शिक्षामित्र के रूप में हुई है, इसलिए नियमों के तहत उन्हें नियमित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अंत में निर्णय दिया कि याचिकाकर्ता सक्षम अधिकारी के समक्ष दो सप्ताह में अपना प्रत्यावेदन प्रस्तुत करें और सक्षम प्राधिकारी आठ सप्ताह में आवश्यक निर्णय ले।

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