तिरुवनंतपुरम , मार्च 03 -- केरल में शिक्षकों और अभिभावकों ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा दो मार्च को आयोजित कक्षा 10 की हिंदी पाठ्यक्रम बी परीक्षा पर चिंता जताते हुए प्रश्नपत्र के लंबा, भ्रमपूर्ण और असंगत होने का आरोप लगाया है।
शिक्षकों के अनुसार प्रश्नपत्र काफी लंबा था और कई सवाल पेचीदे थे। पहले पढ़ी गयी कविता पर आधारित अनुभाग ने विद्यार्थियों के बीच भ्रम पैदा किया। इसके अलावा कई बहुविकल्पीय सवालों में जवाब के विकल्प बहुत मिलते-जुलते थे, जिससे विद्यार्थियों के लिए आत्मविश्वास के साथ सही जवाब चुनना मुश्किल हो गया। शिक्षकों-अभिभावकों ने 16-अंक के व्याकरण अनुभाग के बारे में भी गंभीर चिंताएं जतायीं, जहां परीक्षा के तीनों सेट में सवाल पूरी तरह से अलग थे। शिक्षकों ने कहा कि अंतर काफी थे और इससे प्रश्नपत्र की कठिनाई का स्तर बढ़ा हुआ था। इसी तरह पाठ्यपुस्तक-आधारित अनुभाग में गद्य वाले हिस्से के सवाल हर सेट में पूरी तरह से अलग थे, जिससे प्रश्नपत्र और भी चुनौतीपूर्ण हो गया, खासकर गैर-हिंदीभाषी राज्यों के विद्यार्थियों के लिए। कुल मिलाकर शिक्षकों और अभिभावकों ने परीक्षा को कठिन और मुश्किल बताया।
उन्होंने कहा कि इससे कई विद्यार्थियों का हौसला टूटा, जिनमें अच्छे नंबर लाने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं, जो आमतौर पर हिंदी को अधिकतम अंक लाने वाले विषय मानते हैं। अभिभावकों ने सीबीएसई से अपील की है कि वह सभी सेट में एक जैसे सवाल शामिल करके प्रश्नपत्र सेट को एक जैसा बनाये रखने पर विचार करे। उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि बोर्ड हिंदी के लिए एक संतुलित और सामान्य स्तर अपनाये, जैसा कि कुछ क्षेत्रीय भाषाओं के प्रश्नपत्र के लिए अपनाया जाता है।
उन्होंने इसके अलावा बोर्ड से अपील की है कि वह गैर-हिंदीभाषी राज्यों के विद्यार्थियों की भाषा का ध्यान रखे, ताकि यह पक्का हो सके कि जो लोग हिंदी को दूसरी भाषा के तौर पर चुनते हैं, उन्हें क्षेत्रीय भाषा चुनने वाले विद्यार्थियों की तुलना में नुकसान न हो।
शिक्षकों और अभिभावकों ने सीबीएसई से इस मामले की समीक्षा करने को कहा है, ताकि भविष्य की परीक्षाओं में विद्यार्थियों में और भरोसा पैदा हो सके।
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