लेह , मई 01 -- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में डेयरी अवसंरचना एवं सहकारी क्षेत्र की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया जिसमें करगिल में 25 करोड़ रुपय की लागत से 10,000 लीटर प्रतिदिन दूध प्रोसेसिंग क्षमता वाले डेयरी प्लांट का शिलान्यास भी शामिल है।

लेह में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन तथा लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना भी उपस्थित थे।

इस मौके पर श्री शाह ने कहा , " हम लद्दाख में डेयरी अवसंरचना का विस्तार करने जा रहे हैं। लेह में आने वाले दिनों में 70 करोड़ रुपए की लागत से 50,000 लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला एक नया संयंत्र स्थापित किया जाएगा।" उन्होंने कहा कि लद्दाख में पश्मीना, ऑर्गेनिक उत्पादों और शहद के लिए आगामी दिनों में सहकारी संस्थाएं बनाई जाएंगी। मोदी सरकार ने लेह-लद्दाख और करगिल की केंद्र शासित क्षेत्र बनाये जाने की मांग पूरी की, जिससे क्षेत्र के विकास पर छह हजार करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं जो पहले की तुलना में छह गुना अधिक है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने लद्दाख में 5 नए जिलों और 5 आधिकारिक भाषाओं को मान्यता दी है। इसके साथ ही यहां सिंधु इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन की स्थापना से आने वाले दिनों में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं पर जब-जब सीमा पार से संकट आया, तब-तब सबसे पहले लद्दाख के लोगों ने सीने पर गोली खाकर उसका मजबूती से सामना किया है।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि करगिल में आज 25 करोड़ की लागत वाले जिस दुग्ध संयंत्र का शिलान्यास हुआ है, जिसकी क्षमता 10,000 लीटर दूध प्रतिदिन प्रोसेस करने की है।इससे करगिल की महिलाएं दुधारू पशुओं का पालन कर अपने जीवन में उजाला ला सकती हैं, परिवार की मदद कर सकती हैं और आत्मनिर्भर भी बना सकती हैं।

श्री शाह ने कहा कि वह गुजरात से आते हैं जहाँ की महिलाओं ने ऐसी ही छोटी-छोटी डेयरियों के माध्यम से 1,25,000 करोड़ रुपये का कारोबार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि लेह में पहले से काम कर रहे मिल्क प्लांट में प्रतिदिन उत्पादन की व्यवस्था शुरू हो रही है।

उन्होंने कहा कि लद्दाख में भारत तिब्बत सीमा बुलिस बल ( आईटीबीपी) और सेना बहुत बड़े खरीददार हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आईटीबीपी और सेना की दूध, दही और पनीर की जरूरत इस प्लांट से पूरी होगी। श्री शाह ने कहा कि 45 लाख रुपए की लागत से एक मोबाइल प्रयोगशाला भी लॉन्च की गई है, जिससे दूध की क्वालिटी के रखरखाव में बहुत फायदा होगा। उन्होंने कहा कि एंड्रॉइड आधारित एएमसीएस ऐप का शुभारंभ भी हुआ है, जिससे हमारे दुग्ध उत्पादक पशुपालक पारदर्शिता के साथ अपने दूध का हिसाब-किताब एक ही ऐप पर देख पाएंगे। आज जिन पाँच पशुपालकों को पुरस्कृत किया गया वे करगिल और लेह के सभी पशुपालकों के लिए प्रेरणा का रूप हैं।

श्री शाह ने कहा कि लद्दाख मिल्क फेडरेशन और मदर डेयरी ने एक समझौता किया है। इससे लद्दाख को देश के बाजार के साथ जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से आग्रह किया कि वह इसके लिए नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक लिमिटेड को साथ लेकर एक त्रिपक्षीय एमओयू करें। उन्होंने कहा कि मदर डेयरी के प्रोडक्ट तो यहां बेचे ही जाएं, साथ ही मदर डेयरी अन्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से यहां के प्रोडक्ट की भी देश भर में मार्केटिंग की व्यवस्था करे।

उन्होंने कहा कि पशुपालकों को स्थानीय के मौसम के अनुरूप अच्छी नस्ल की गाय और भैंस उपलब्ध कराने का काम होगा। लगभग हर साल अच्छी नस्ल की 500 गाय और भैंसे यहां उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा। आगामी 10 साल में पशुओं की संख्या में लगभग तीन गुनी बढ़ोतरी करने की योजना है।

श्री शाह ने कहा कि लद्दाख मिल्क फेडरेशन और एनडीडीबी में समझौता होने के बाद यह नेटवर्क 28 गांवों तक पहुंचा है और लगभग 1700 दुग्ध उत्पादक इससे जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा गांवों में, जहां पशुपालन संभव हो। स्थानीय स्तर पर दूध की खरीद लगभग 7000 किलोलीटर दैनिक तक पहुंची है। इसे अगले चार साल में 21,000 किलोलीटर तक पहुंचाकर यहां के किसानों की समृद्धि के लिए हमें आगे बढ़ना चाहिए।

श्री शाह ने कहा कि 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद पूरे देश के पशुपालन और डेयरी क्षेत्र के परिदृश्य में बहुत बड़ा बदलाव आया है।पशुपालन विभाग में कई क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। 2014-15 में कुल दूध उत्पादन 14.6 करोड़ टन था। 2014-15 से लेकर 2024-25 के बीच यह बढ़कर 24.8 करोड़ टन हो गया है। जो केवल दस वर्ष में 70 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है। 50 प्रतिशत वृद्धि पिछले 5 साल में हुई है।उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 2013-14 में 307 ग्राम थी, जो अब 485 ग्राम हो गई है।

देश भर में कुल 2,36,000 सहकारी समितियों और लगभग 2 करोड़ दूध उत्पादकों के माध्यम से भारत ने यह उपलब्धि प्राप्त की है। पांच साल में 75,000 नई दूध समितियां बनाने का लक्ष्य रखा हैऔर 46,000 मौजूदा समितियों को आधुनिक व सक्षम बनाने का भी प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 75,000 में से 21,000 नई समितियां बनाने का काम हो चुका है।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि लद्दाख के प्रशासन से आग्रह है कि लद्दाख के हर गांव, जहां दूध उत्पादन और पशुपालन की संभावना है, का दोहन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां पश्मीना, ऑर्गेनिक उत्पादों और शहद से संबंधित सहकारी संस्थाओं को भी सहकारिता विभागआने वाले दिनों में जमीन पर उतारेगा।

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