कोलकाता , मार्च 28 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और घुसपैठ को बढ़वा देने तथा तुष्टिकरण एवं भय की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि राज्य विधानसभा का चुनाव न केवल इस प्रदेश में विकास और सुरक्षा बल्कि देश की सुरक्षा का सवाल बन गया है।
श्री शाह ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में ऐसे तमाम आरोपों के साथ तृणमूल सरकार के विरुद्ध एक 'आरोप-पत्र' जारी किया और इसे ममता सरकार के खिलाफ जनता का आरोप पत्र बताया। उन्होंने राज्य में लगातार पिछले कुछ चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बढ़ते जन समर्थन के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए प्रदेश के मतदाताओं से 'भय छोड़ कर, भरोसे (भाजपा) को चुनने का आह्वान किया।
उन्होंने ममता सरकार पर अन्य पिछड़ा वर्ग केे लोगों का हक मारने तथा महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों को रोकने में विफल रहने का अरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं दी है। उन्होंने कहा कि ममता सरकर ने 77 समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की सूची में जोड़ा, उसमें 75 मुस्लिम समुदाय हैं और इस तरह इस राज्य में धर्म देख कर ओबीसी का दर्जा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 10 वर्षों में वोट में 10 प्रतिशत से 38 प्रतिशत और विधान सभा में 3 से 77 सीट की यात्रा तय की है और इस बार भारी जन समर्थन से यहां भाजपा सरकार बनेगी। उन्होंंने मतदता सूची के शुद्धिकरण को लेकर पश्चिम बंगाल में तनाव के मुद्दे पर कहा कि केवल इसी राज्य में न्यायिक अधिकारी लगाने की नौबत आयी है। उन्होंने कहा, ' बंगाल से कई उद्योग पलायन कर गए, लेकिन ममता बनर्जी को केवल घुसपैठियों के वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की चिंता है। ममता दीदी को जो भी आरोप लगाना है, लगा लें, हम एक एक घुसपैठिये को चुन-चुनकर बाहर करेंगे।"संवाददाता सम्मेलन में पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी और प्रदेश के अन्य नेता उपस्थित थे।
श्री शाह ने कहा कि राज्य में भय का वातावरण बनाया गया है है ओर भाजपा के बड़े नेताओं पर तृणमूल कांग्रेस ने हमले कराये हैं और 300 से अधिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं की की हत्याएं की गयी हैं जिनमें बहुत से भाजपा के समर्थक और कार्यकर्ता थे। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद प्रदेश में महिलाओं का हाल सबसे खराब है और आर.जी.कर अस्पताल, संदेशखाली, दुर्गापुर सामूहिक बलात्कार की घटनाएं तथा महिलाओं पर अत्याचार के बड़ी संख्या में दर्ज अनय मामले इसका प्रमाण हैं। ममता बनर्जी ने राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला, मनरेगा जॉब कार्ड घोटाला, मवेशी तस्करी जैसे घोटालों से बंगाल को घपलों-घोटालों का प्रदेश बना दिया।
भाजपा नेता ने कहा कि श्री अधिकारी ने भी चुनाव से पहले पूरे बंगाल का दौरा कर राज्य में फैली अव्यवस्थाओं, अराजकता और आर्थिक बदहाली तथा विशेष रूप से घुसपैठ के मुद्दे को बंगाल के जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा, ' बंगाल का यह चुनाव बंगाल के लिए तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही पूरे देश के लिए भी महत्वपूर्ण है। पूरे देश की सुरक्षा एक प्रकार से बंगाल के चुनाव से जुड़ी हुई है। असम में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वहाँ से घुसपैठ कमोबेश समाप्त हो गई है और अब एक ही रास्ता बचा है, जहाँ से घुसपैठ होकर घुसपैठिए पूरे देश में फैलते हैं तथा देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करते हैं। " उन्होंने कहा कि भाजपा तृणमूल कांग्रेस के शासन के खिलाफ जनता के जो मुद्दों को मुखर करते हुए बंगाल और देश की जनता के सामने प्रस्तुत करेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा , ' आने वाला चुनाव इस बात को तय करेगा कि बंगाल की जनता भय को चुनती है या भरोसे को। भय के आतंक से मुक्ति पाकर जिस प्रकार देश भरोसे के साथ तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, उसी के साथ बंगाल को भी जुड़ना चाहिए और यही इस चुनाव का निर्णयकारी प्रश्न है।" उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के चुने जाने का आधार जनकल्याण के कार्य होते हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने का आधार झूठ, डर और हिंसा रहा है। भाजपा वर्ष 2011 से ही इसके खिलाफ संघर्ष कर रही है और उन्हें विश्वास है कि इस बार बंगाल की जनता पूर्ण बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने जा रही है।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव शांति के भरोसे का, सम्मानजनक जीवन की गारंटी का और गरीबों को मुफ्त इलाज मिलने के विश्वास का चुनाव है। यह चुनाव इस भरोसे का है कि पक्के घर का अधिकार सिंडिकेट न छीन सके, मुफ्त बिजली हर गरीब तक पहुँचे और हर घर में नल से जल उपलब्ध हो। यह युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और घुसपैठियों से मुक्त एक बंगाली समाज के निर्माण के विश्वास का चुनाव है और यही भरोसा आज बंगाल के चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गया है। घुसपैठ की राजनीति के कारण सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा कमजोर हुई है और मवेशी तस्करी तथा नकली मुद्रा के प्रसार से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के शासन में अनेक घोटाले सामने आए हैं, जिनमें शिक्षक भर्ती घोटाला, जिसमें 26,000 नौकरियां रद्द हुईं, मनरेगा जॉब कार्ड घोटाला, प्रधानमंत्री आवास योजना घोटाला, मिड-डे मील घोटाला, पीएमजीएसवाई सड़क घोटाला, मालदा बाल राहत घोटाला, अफान राहत घोटाला और मवेशी तस्करी घोटाला शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस के कई सांसद, विधायक और पदाधिकारी इन घोटालों में जेल में हैं, फिर भी उन्हें टिकट दिया गया है।
उन्होंने कहा कि ममता सरकार में बंगाल, कविगुरु के आदर्शों वाला बंगाल नहीं रह गया है और ममता बनर्जी के शासन में बंगाली अस्मिता का स्तर अत्यंत नीचे चला गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आज बंगाल को एक औद्योगिक कब्रिस्तान के रूप में जाना जा रहा है, जहाँ से अनेक उद्योग पलायन कर गए। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश ( एफडीआई ) का प्रवाह 30 प्रतिशत गिरकर केवल 2,662 करोड़ रुपये रह गया है, जो इतने बड़े राज्य के लिए अत्यंत कम है, जहाँ से 40 लोकसभा सीटें आती हैं।
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