गुवाहाटी , दिसंबर 29 -- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को असम में घुसपैठ की समस्या के लिए राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पिछले दस वर्षों में राज्य से अवैध घुसपैठियों को पहले ही निष्कासित कर दिया है।

श्री शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भाजपा सरकार असम से सभी अवैध घुसपैठियों को बाहर कर देगी।

केंद्रीय गृह मंत्री ने आज असम के नागांव जिले के पवित्र बटाद्रवा थान में श्रीमंत शंकरदेव अभिर्भव क्षेत्र का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। बटाद्रवा थान 15वीं शताब्दी के संत एवं समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव का जन्म स्थान है।

असम में पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकारों पर निशाना साधते हुए श्री शाह ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने के लिए राज्य में अवैध प्रवासियों को कानूनी रूप से बसाने के लिए 1983 में अवैध (प्रवासी) निर्धारण न्यायाधिकरण (आईएमडीटी) अधिनियम लाया था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने असम में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि असम की भाजपा सरकार ने पिछले पांच वर्षों में एक लाख बीघा से अधिक भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराया है।

श्री शाह ने कहा कि भाजपा सरकार न केवल असम से बल्कि पूरे देश से सभी अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि असम में अवैध घुसपैठियों को बसाने के लिए कांग्रेस की वोट बैंक की राजनीति ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है।

श्री शाह ने कहा कि असम ने डॉ. मनमोहन सिंह को राज्यसभा में भेजा था लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वह सिर्फ सात बार असम गए। उन्होंने कहा कि उन सात बार के असम दौरे में से दो बार वह राज्यसभा चुनाव में अपना वोट डालने के लिए गए थे।

गृह मंत्री ने असम एवं पूर्वोत्तर के 70 वर्षों से अनदेखी के लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में असम में किए गए विकास कार्यों को राज्य को 'स्वर्ण युग' के रूप में याद किया जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि असम का विकास एवं शांति कभी भी कांग्रेस के एजेंडे में शामिल नहीं थे। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य में भाजपा के शासनकाल के दौरान बोडो शांति समझौता, कार्बी शांति समझौता, आदिवासी शांति समझौता, उल्फा शांति समझौता सहित सभी शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

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