बारां , मार्चं 23 -- राजस्थान में बारां जिले के शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के तहत शाहबाद घाटी संरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर सोमवार को बारां से शाहबाद तक आयोजित जनजागृति विरासत यात्रा ने पूरे क्षेत्र में जनचेतना की लहर दौड़ा दी।

सैंकड़ों की संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने सरकार और ग्रीनको के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि शाहबाद के जंगल किसी भी कीमत पर कटने नहीं दिए जाएंगे।

यात्रा की शुरुआत श्रीराम स्टेडियम, बारां से हुई, जहां समिति के संरक्षक बृजेश विजयवर्गीय ने अपने उद्बोधन में कहा कि विकास के नाम पर विनाश अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जंगल बचेंगे तभी जीवन बचेगा। उन्होंने सरकार से पर्यावरणीय संतुलन के साथ निर्णय लेने की मांग की।

किशनगंज में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता रोबिन सिंह ने आंदोलन को राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए कहा कि शाहबाद घाटी केवल बारां की नहीं, पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। यहां ऊर्जा संयंत्र लगाना पर्यावरणीय अपराध होगा।

भंवरगढ़ में जागो किसान आंदोलन के अध्यक्ष वरदान सिंह हाडा ने किसानों की पीड़ा सामने रखते हुए चेताया कि जंगल कटे तो खेती, पानी और भविष्य तीनों खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसान इस लड़ाई में पीछे हटने वाला नहीं है।

केलवाड़ा में लेडी इंटेक की अध्यक्ष नीता शर्मा ने महिला शक्ति की ओर से पर्यावरण संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि जंगल बचाना हमारी पीढ़ी की जिम्मेदारी है, नहीं तो आने वाली नस्लें हमें माफ नहीं करेंगी।

समरानियां में गब्बर सिंह यदुवंशी ने आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जंगल काटने का प्रयास हुआ तो जनआंदोलन और उग्र रूप लेगा।

यात्रा का समापन शाहबाद में हुआ, जहां सभी वक्ताओं और आंदोलनकारियों ने संयुक्त रूप से हुंकार भरते हुए प्रशासन को चेताया। इसके पश्चात एडीएम जब्बरसिंह को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें ऊर्जा संयंत्र को अन्यत्र स्थापित करने तथा शाहबाद जंगल की कटाई तत्काल रोकने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि शाहबाद घाटी के जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि जीवन, पानी और भविष्य की गारंटी हैं और इनके संरक्षण के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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