शाहजहांपुर , फरवरी 23 -- उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में होली पर निकलने वाले ऐतिहासिक लाट साहब के जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन पिछले एक माह से तैयारियों में जुटा है। जुलूस मार्ग में पड़ने वाली मस्जिदों, मजारों और कब्रिस्तानों को तिरपाल और मोटी प्लास्टिक से ढकने के साथ बैरिकेडिंग का कार्य कराया जा रहा है। इस वर्ष सुरक्षा व्यवस्था पिछले वर्ष की तुलना में डेढ़ गुना अधिक रखी गई है और 200 से अधिक मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी ने बताया कि जुलूस में चार अपर पुलिस अधीक्षक, 13 पुलिस क्षेत्राधिकारी, 310 उपनिरीक्षक, 1200 सिपाही और 500 होमगार्ड के अलावा पीएसी की चार कंपनी, रैपिड एक्शन फोर्स की चार कंपनी तथा एनडीआरएफ की टीम तैनात रहेगी। आठ किलोमीटर के दायरे में निकलने वाले बड़े और छोटे लाट साहब के जुलूस की निगरानी के लिए 100 सोलर पावर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष छिटपुट घटनाओं के मद्देनजर इस बार एक अतिरिक्त जोन बनाया गया है। सभी थानों और चौकियों पर शांति समिति की बैठकें आयोजित कर लोगों से सौहार्दपूर्ण ढंग से पर्व मनाने की अपील की जा रही है। कानून व्यवस्था भंग करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) रजनीश कुमार मिश्रा ने बताया कि जुलूस मार्ग में पड़ने वाली 48 मस्जिदों और मजारों को पूरी तरह ढका गया है तथा 148 गलियों में बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि भीड़ अनियंत्रित न हो। जुलूस को सात जोन में विभाजित कर प्रत्येक जोन में सेक्टर और उपसेक्टर बनाए गए हैं। 136 स्टेटिक मजिस्ट्रेट जुलूस के संचालन की निगरानी करेंगे। इसके अतिरिक्त होलिका दहन स्थलों पर 103 मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे। एहतियातन जिला बदर और निरोधात्मक कार्रवाई भी की गई है।
स्वामी सुकदेवानंद कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि इस जुलूस की परंपरा 18वीं शताब्दी से जुड़ी है। नवाब अब्दुल्ला खान के फर्रुखाबाद से लौटने पर होली के दिन हिंदू-मुस्लिम समाज ने उनके साथ नगर भ्रमण किया, जिससे यह परंपरा प्रारंभ हुई। 1857 के बाद ब्रिटिश शासन के दौरान भी यह जुलूस जारी रहा। वर्ष 1988 में तत्कालीन जिलाधिकारी कपिल देव ने इसका नाम 'नवाब साहब' से बदलकर 'लाट साहब' कर दिया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1990 में जुलूस को लेकर दायर याचिका पर उच्च न्यायालय ने इसे पुरानी परंपरा मानते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया था। प्रशासनिक प्रशिक्षण में भी इस जुलूस का उल्लेख किया जाता है।
परंपरा के अनुसार होली के दिन एक व्यक्ति को 'लाट साहब' बनाया जाता है, जिसे भैंसा गाड़ी पर तख्त पर बैठाकर जुलूस निकाला जाता है। जुलूस फूलमती देवी मंदिर से प्रारंभ होकर कोतवाली पहुंचता है, जहां प्रतीकात्मक रूप से कोतवाल से वर्षभर के अपराधों का ब्यौरा मांगा जाता है। इस ऐतिहासिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित