लखनऊ , फरवरी 18 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुधवार को लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और शासनादेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट कहा कि यदि अधिकारियों के स्तर पर विधायकों से संबंधित शासनादेशों का पालन नहीं किया जाता है, तो यह सेवा नियमावली का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में कहा कि शासन स्तर से प्रस्तुत प्रकरणों में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं और पूर्व में निर्गत आदेशों के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

लोकतंत्र की मूल भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास से ही जनप्रतिनिधि सदन में पहुंचे हैं। इस विश्वास की रक्षा करना शासन, प्रशासन और सभी संवैधानिक संस्थाओं का दायित्व है। संविधानिक प्रावधानों के अंतर्गत प्रस्तुत मामलों में अपेक्षित कार्रवाई करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सदन में होने वाली चर्चाएं, पारित संकल्प और प्रस्ताव संविधानसम्मत प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और उनका अनुपालन कराना संवैधानिक दायित्व है। सदन के निर्णयों का सम्मान किया जाना चाहिए और सभी सदस्यों से अपेक्षा की गई कि वे कार्यपालिका और न्यायपालिका की मर्यादा का सम्मान करते हुए अपनी-अपनी संवैधानिक सीमाओं में कार्य करें।

अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया कि संबंधित प्रकरणों में शासन स्तर से सख्त निर्देश जारी किए जाएं और शासनादेशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संस्थाओं के बीच संतुलन, पारस्परिक सम्मान और जनता की सर्वोच्चता के मूल भाव का संरक्षण अनिवार्य है।

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