भोपाल , मार्च 06 -- मध्यप्रदेश में शाला त्यागी बालिकाओं को पुन: शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत सरस्वती अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से सामाजिक, पारिवारिक या आर्थिक कारणों से विद्यालय छोड़ चुकी बालिकाओं को फिर से शिक्षा से जोड़कर आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा।
राज्य स्तर पर अभियान का शुभारंभ 10 मार्च को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। इस दौरान शाला त्यागी बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए विभाग की कार्य योजना और नवाचारों की जानकारी भी दी जाएगी।
अभियान के तहत राज्य ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से बालिकाओं को कक्षा आठवीं, दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा। उन्हें अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, संपर्क कक्षाएं और मेंटोरिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आगे की शिक्षा या रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकें।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार प्रदेश में बड़ी संख्या में बालिकाएं कक्षा आठवीं, दसवीं या बारहवीं से पहले ही विद्यालय छोड़ देती हैं। शिक्षा छूटने के बाद उन्हें पढ़ाई जारी रखने का अवसर नहीं मिल पाता, जिससे उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और भविष्य के अवसर सीमित हो जाते हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में यह समस्या अधिक गंभीर रूप में सामने आती है।
इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा सरस्वती अभियान के अंतर्गत शाला त्यागी बालिकाओं की पहचान के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा और उन्हें राज्य ओपन स्कूल में नामांकित किया जाएगा। परीक्षा की तैयारी के लिए अध्ययन सामग्री और शैक्षणिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही मेंटोरिंग और काउंसलिंग के माध्यम से बालिकाओं को निरंतर सहयोग दिया जाएगा।
अभियान के तहत परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर आगे की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मसम्मान का विकास करना है। अभियान बालिका शिक्षा की दर बढ़ाने, पढ़ाई बीच में छोड़ने की प्रवृत्ति कम करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने में भी यह अभियान सहायक साबित हो सकता है।
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