सरगुजा , जनवरी 27 -- छत्तीसगढ के सरगुजा में खेतों की सिंचाई और मवेशियों को पीने का पानी साल भर मिलता रहे इसे लेकर ग्राम मोहनपुर के लोगों ने मिलकर 100 साल पहले एक कच्चा बांध बनाया था। इस बांध के किनारे - किनारे गांव के ही दो परिवार के लोगों ने धीरे - धीरे मिट्टी डालकर पाटना शुरू किया, तथा अब बांध के आसपास अतिक्रमण करने वाले परिवार के लोगों ने मवेशियों के पानी, पीने को भी प्रतिबंधित कर दिया है। बांध को कब्जाने की कोशिश की एक लिखित शिकायत आज ग्रामीणों ने सरगुजा कलेक्टर के नाम तहसीलदार जयंत कंवर को सौंपा है।

सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत तिहपहरा के आश्रित ग्राम मोहनपुर के ग्रामीणों के संग एक बुजुर्ग शतरंज तिग्गा भी आया था। शतरंज तिग्गा को याद है कि कैसे उसने अपने जवानी के दिनों में पूरे गांव की सुविधा के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर बांध को बांध (बनाया) दिया था। शतरंज तिग्गा ने बताया कि गांव के सब लोगों ने मिलकर बांध बनाया था। बांध के पानी पर सबका बराबर अधिकार है सालों से ग्रामीण और गांव के पशु इस बांध के सहारे जी रहे हैं। तिग्गा ने सवाल उठाया यदी बांध पर कब्जा हो गया तो खेती नहीं होगी और यदि खेती नहीं होगी तो खाने के लिए अनाज कैसे होगा?जिले के ग्राम मोहनपुर (तहसील दरिमा) के ग्रामीणों ने लगभग 100 साल पुराने साझा बांध 'साझी मुड़ा' पर हुए अतिक्रमण और उसकी दुर्दशा को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की मांग की है।

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