प्रयागराज , जनवरी 19 -- प्रयागराज माघ मेला में रविवार को ज्योतिष पीठ शंकराचार्य विवाद पर कमिश्नर प्रयागराज मंडल सौम्या अग्रवाल ने आज कहा कि शंकराचार्य ने अपने स्नान की कोई सूचना नहीं दी थी। उन्होने एक दिन पहले दो वाहनों की अनुमति मांगी थी लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट रूप से उन्हें अनुमति देने से इंकार कर दिया था। कमिश्नर ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अनुमति न मिलने के बावजूद इमरजेंसी त्रिवेणी पीपा पुल से अपने वाहन पर सवार होकर सैकड़ों अनुयायियों के साथ स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद वहाँ पर आ गए। संगम नोज के पास भी बैरियर तोड़ा गया। अधिकारियों ने उनसे कई बार अनुनय विनय की। उनसे यह भी अपील की गई कि पालकी से उतरकर पैदल जाकर कुछ लोगों के साथ स्नान करेंलेकिन वह पालकी से नहीं नीचे उतरे और वापस चले गए।

उन्होने कहा " किसी भी व्यक्ति को स्नान करने से नहीं रोका गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के हित में जो व्यवस्था बनाई गई है, उसे मेंटेन करने का हमारा दायित्व है ताकि कोई अनहोनी या घटना ना हो। श्रद्धालुओं का हित हमारी पहली प्राथमिकता रहती है। इसी के क्रम में हम यह कहना चाहते हैं कि किसी को हमने गंगा स्नान करने से नहीं रोका है।कोई भी गंगा स्नान करना चाहता है तो हम उसका स्वागत करते है।"मेला अधिकारी ऋषि राज ने कहा कि मौनी अमावस्या का दिन प्रयागराज के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। कल पूरे विश्व की सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर प्रयागराज बना। श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने संगम में स्नान किया। कल चार करोड़ 52 लाख श्रद्धालुओं ,संत महात्माओं और कल्प वासियों ने स्नान किया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का 2022 का स्पष्ट तौर पर जजमेंट है।उसी के तौर पर शंकराचार्य को किसी भी तरह का प्रोटोकॉल नहीं दिया गया है। अगर मेला प्रशासन ऐसा प्रोटोकॉल देगा तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होगी।

उच्च अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य से लगातार अनुनय विनय किया गया था। उनके द्वारा लगातार तीन घंटे तक वापसी मार्ग को अवरुद्ध रखा गया था।उनके लिए किसी तरह का व्हीकल का परमिशन नहीं जारी किया गया था। मेला अधिकारी ने कहा है कि सभी साक्ष्यों सबूतों को हम इकठ्ठा कर रहे है। उन्होंने कहा कि हम उसके आधार पर आगे कानूनी कार्यवाही करेंगे,कल्प वासियों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। हमने मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की जीवन की सुरक्षा की। उन्होंने कहा है कि स्नान के लिए किसी ने किसी को नहीं रोका है। मेला अधिकारी ने कहा कि कई दूसरे पूजनीय संत भी आए और स्नान कर वापस चले गए।

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