रायपुर , मार्च 10 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस और परिवहन नियमों के पालन को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार के जवाब को अधूरा बताते हुए विरोध दर्ज कराया और अंत में सदन से बहिर्गमन किया।

प्रश्नकाल के दौरान विधायक ओंकार साहू ने परिवहन विभाग से सवाल करते हुए पिछले तीन वर्षों में व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच से जुड़ी जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि इस अवधि में कितने वाहनों को बिना परीक्षण फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए। साथ ही ओवरलोडिंग, बिना परमिट संचालन और बिना बीमा के चलने वाले वाहनों के खिलाफ दर्ज प्रकरणों और वसूली गई राशि का भी विवरण मांगा।

जवाब में परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बिना भौतिक परीक्षण के किसी भी वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में ओवरलोडिंग और बिना परमिट संचालन जैसे मामलों में कुल 77,810 प्रकरण दर्ज किए गए हैं और इस दौरान 42 करोड़ 79 लाख 5 हजार 300 रुपये की वसूली की गई है।

मंत्री के जवाब से हालांकि विपक्ष संतुष्ट नहीं दिखा। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पूरक प्रश्न में कहा कि जो जानकारी मांगी गई थी, उसका पूरा विवरण सदन में उपलब्ध नहीं कराया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली ढीली है और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

इस पर सत्ता पक्ष की ओर से भारतीय जनता पार्टी विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है लेकिन सदन में इस तरह की चेतावनी देना उचित नहीं है।

इसके बाद श्री बघेल ने कहा कि परिवहन मंत्री का अपने विभाग पर नियंत्रण नहीं दिख रहा है और मांगी गई जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन किया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित