नयी दिल्ली , फरवरी 03 -- प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट ' में प्रकाशित नया अध्ययन बताता है कि अमेरिका, ब्रिटेन फ़्रांस और जर्मनी ने लगभग 30 वर्षों में पहली बार अपने आधिकारिक विकास सहायता(ओडीए) योगदानों में उल्लेखनीय कटौती की है जिससे विश्व में एशियाई क्षेत्र और अनेक देशों की स्वास्थ्य प्रगति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ ने आज बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फ़ॉर ग्लोबल हेल्थ (आईएस ग्लोबल) का एक नया अध्ययन प्रकाशित किया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि वैश्विक सहायता में तीव्र गिरावट से 93 निम्न- एवं मध्यम-आय वाले देशों में 2030 तक 2.26 करोड़ अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं, जिनमें पाँच वर्ष से कम आयु के 54 लाख बच्चे शामिल हैं।
इस विश्लेषण से पता चलता है कि उप-सहारा अफ्रीका-जहाँ अध्ययन में शामिल 93 में से 38 देश हैं-विशेष रूप से जोखिम में है। इसके अलावा एशिया के 21 देश, लैटिन अमेरिका के 12, मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के 12 तथा यूरोप के 10 देश (यूक्रेन सहित) भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि 2002 से 2021 के बीच आधिकारिक विकास सहायता ने बाल मृत्यु दर में 39 प्रतिशत की कमी लाने, एचआईवी/एड्स से होने वाली मौतों में 70 प्रतिशत की कमी करने, तथा मलेरिया और पोषण-सम्बंधी कमियों से होने वाली मौतों में 56 प्रतिशत की कमी करने में मदद की। इन 93 देशों में विश्व की 75 प्रतिशत आबादी निवास करती है। वर्ष 2024 में पिछले छह वर्षों में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सहायता में गिरावट आई है।
आईएस ग्लोबल में आईसीआरईए के शोध प्रोफ़ेसर तथा ब्राज़ील के इंस्टीट्यूट ऑफ़ कलेक्टिव हेल्थ के प्रोफ़ेसर डेविडे रसेला ने कहा "हमारे विश्लेषण दर्शाते हैं कि विकास सहायता उपलब्ध वैश्विक स्वास्थ्य समाधानों में सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। पिछले दो दशकों में इससे लाखों लोगों की जानें बचाई गयी हैं । इस सहायता को अभी वापस लेना न केवल कठिन परिश्रम से हासिल की गयी स्वास्थ्य प्रगति पर प्रतिकूल असर डालेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में वयस्कों और बच्चों की मौतों का सीधा कारण बनेगा जिन्हें राेका जा सकता है। आज दाता देशों में लिए गए बजट संबंधी निर्णयों के परिणाम आने वाले वर्षों तक लाखों लोगों के लिए अपरिवर्तनीय होंगे।"गौरतलब है कि विश्च के सबसे बड़े दाताओं और अन्य देशों द्वारा अरबों डॉलर की सहायता में कटौती जारी रहने के बीच, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) का अनुमान है कि 2024 से 2025 के बीच आधिकारिक विकास सहायता में 10 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है।
इन देशों में विकास सहायता के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिये आईएस ग्लोबल ने "द रॉकफ़ेलर फ़ाउंडेशन कैपिटल" के सहयोग से 2002 से 2021 के बीच 93 देशों के 20 वर्षों के विकास आँकड़ों की जाँच की, जहाँ कुल 6.3 अरब लोग रहते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित