कोट्टायम , फरवरी 03 -- श्रीलंका में भारतीय उच्चायोग की प्रथम सचिव रोशनी थॉमसन ने कहा है कि वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करना बहुत गर्व की बात है और एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।

सुश्री थाॅमसन अल्फोंसा कॉलेज, पाला में आयोजित 'मीट द डिप्लोमैट' कार्यक्रम में छात्रों से बातचीत कर रही थीं।

उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि राजनयिक सेवा का सबसे बड़ा सम्मान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए बोलना है। "भारत" के नामपट्ट के पीछे बैठकर देश के विचारों को व्यक्त करने के लिए आत्मविश्वास, स्पष्टता और राष्ट्रीय हितों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की ज़रूरत होती है।

उन्होंने बताया कि राजनयिकों पर भारत की विदेश नीति की स्थितियों और दृष्टिकोणों को दूसरे देशों के सामने सही और भरोसेमंद तरीके से पेश करने की ज़िम्मेदारी होती है। उन्होंने विदेश सेवा अधिकारियों की भूमिका और काम करने के तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि कूटनीति में लगातार सीखने और ढलने की ज़रूरत होती है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय माहौल से करीब से जुड़कर ही राजनयिक भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक हितों की रक्षा कर सकते हैं और देशों के बीच संबंधों को मज़बूत करने में सार्थक योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय अधिकारियों को अक्सर राष्ट्रीय हितों को प्रभावित करने वाले वैश्विक घटनाक्रमों पर तेज़ी से और सोच-समझकर जवाब देने की ज़रूरत होती है।

सुश्री थॉमसन ने युवा पीढ़ी से कूटनीति और सिविल सेवाओं में करियर बनाने पर विचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि ज़्यादा से ज़्यादा युवाओं, जिनमें स्पष्ट सोच और देश के प्रति मज़बूत प्रतिबद्धता वाली महिलाएं शामिल हैं, को विदेश सेवा में आना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस क्षेत्र में सफलता के लिए समर्पण, एक व्यापक विश्वदृष्टि और ईमानदारी ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा, हालांकि मुश्किल है, लेकिन लगातार कड़ी मेहनत, अनुशासित तैयारी और लक्ष्य पर फोकस करके इसे पास किया जा सकता है।

उन्होंने अपने करियर के कुछ सबसे यादगार और गर्व के पल भी साझा किए।

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