जम्मू , जनवरी 30 -- जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता, संघर्ष और जलवायु संकट के इस युग में महात्मा गांधी के अहिंसा, सत्य और मानवीय गरिमा के आदर्श पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।
गांधी ग्लोबल फैमिली द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री सिन्हा ने कहा कि ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित यह कार्यक्रम मात्र एक स्मृति सभा नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के लिए शांति और आशा का प्रतीक है। उनके अनुसार, गांधीवादी आदर्शों ने न केवल पिछली पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया बल्कि आज की दुनिया के लिए भी प्रकाशस्तंभ का काम करते हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि वर्तमान युग अनिश्चितताओं से भरा है, जहां भू-राजनीतिक तनाव, सामाजिक विभाजन और आर्थिक परिवर्तन वैश्विक स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। हाल की अंतरराष्ट्रीय स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने 27 जनवरी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते की अंतिम मंजूरी को दो दशकों की बातचीत के बाद एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में न केवल देशों के बीच बल्कि समाजों और व्यक्तियों के बीच भी तनाव बढ़ रहा है, और स्थिति ऐसी है मानो दुनिया एक ऐसी चिंगारी का इंतजार कर रही है जो मौजूदा संबंधों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।
राज्यपाल सिन्हा ने कहा, ' यदि दुनिया के एक कोने में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और दूसरे कोने में जलवायु परिवर्तन मानवता के भविष्य के लिए खतरा बन गया है, तो महात्मा गांधी की आवाज प्रोत्साहन और दिशा प्रदान करती है।' 'श्री सिन्हा के अनुसार, गांधी केवल अतीत के नेता ही नहीं बल्कि वर्तमान के लिए भी मार्गदर्शक थे। उनकी अहिंसा, सत्य और आत्मनिर्णय की विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी आजादी की लड़ाई के समय थी।
उन्होंने 16 मार्च, 1947 को साप्ताहिक हरिजन में प्रकाशित महात्मा गांधी के एक प्रसिद्ध उद्धरण का हवाला देते हुए कहा कि गांधी धर्मों को, उनकी विविधता के बावजूद, एक ही स्रोत की विभिन्न शाखाएँ मानते थे, ठीक उसी तरह जैसे एक पेड़ की अनगिनत शाखाएँ होती हैं लेकिन जड़ एक ही होती है।
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