नयी दिल्ली , मार्च 20 -- खनन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने पिछले 10 साल में आवंटित 85 प्रतिशत खनन ब्लॉक के बंद होने पर चिंता जतायी है।

श्री अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि पिछले 10 वर्षों में नीलाम किये गये करीब 85 प्रतिशत खनन ब्लॉक आज भी चालू नहीं हो पाये हैं। इस दौरान कुल 592 ब्लॉक नीलाम किये गये जिनमें से केवल 82 ही उत्पादन कर रहे हैं, जो एक बड़ी चुनौती की ओर इशारा करता है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच उन्होंने ऊर्जा और खनिज सुरक्षा पर जोर दिया और नीलामी के बाद खदानों को जल्द चालू करने की प्रक्रिया तेज करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसके लिए भूमि अधिग्रहण में तकनीक आधारित सीधे भुगतान की व्यवस्था, मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और प्रीमियम की सीमा 60 प्रतिशत तक तय करना जरूरी है।

श्री अग्रवाल ने कहा कि देश के करीब 400 अरब डॉलर के आयात बिल में से लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा प्राकृतिक संसाधनों के आयात पर खर्च होता है। इससे देश में रोजगार सृजन की संभावनाएं कम हो रही हैं और नौकरियां विदेशों में पैदा हो रही हैं।

उन्होंने इस स्थिति के लिए भूमि अधिग्रहण में दिक्कतों, पर्यावरण और वन मंजूरी में देरी तथा कुछ खदानों पर बहुत अधिक प्रीमियम को जिम्मेदार ठहराया।

वेदांता के चेयरमैन ने कहा कि भारत के पास खनिज, धातु और हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने की बड़ी संभावना है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं, खासकर महिलाओं के लिए।

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