मथुरा , मार्च 11 -- उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी वृंदावन के विश्वप्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर में आयोजित 10 दिवसीय ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन बुधवार को अद्भुत नजारा देखने को मिला। भगवान रंगनाथ ने 'मोहिनी' स्वरूप धारण कर भक्तों को कृतार्थ किया। श्री रामानुज संप्रदाय के इस प्रमुख दिव्यदेश में ठाकुर जी के इस मनमोहक रूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन सुबह गर्भगृह में विशेष अनुष्ठान किए गए। स्वर्ण आभूषणों से अलंकृत ठाकुर जी को भव्य रजत (चांदी) निर्मित पालकी में विराजमान किया गया। परंपरागत कुंभ आरती के बाद बैंड-बाजों और दक्षिण भारतीय वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच सवारी की शुरुआत हुई। ठाकुर जी की यह सवारी वैष्णव संप्रदाय के विभिन्न प्रमुख स्थानों से होते हुए रंगजी के 'बड़ा बगीचा' पहुंची, जहां प्रभु ने कुछ समय विश्राम किया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्वरूप समुद्र मंथन के उस कालखंड की याद दिलाता है जब भगवान नारायण ने असुरों को मोहित करने और देवताओं को अमृत पान कराने के लिए अत्यंत सुंदर 'मोहिनी' रूप धारण किया था। मंदिर के सेवायतों के अनुसार, भगवान के इस अलौकिक रूप के दर्शन मात्र से भक्त सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर प्रभु की भक्ति में लीन हो जाते हैं।
पूरे मार्ग में 'जय रंगनाथ' के उद्घोष से वातावरण गुंजायमान रहा। स्थानीय निवासियों और बाहर से आए श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर पालकी का स्वागत किया। दक्षिण भारतीय परंपरा और ब्रज की संस्कृति का यह अनूठा संगम देखते ही बन रहा था।
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