जगदलपुर , दिसंबर 17 -- छत्तीसगढ़ में बस्तर की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को सहेजने तथा उसे समकालीन विमर्श से जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को जगदलपुर स्थित वीर सावरकर भवन में एक दिवसीय बस्तर साहित्य सम्मेलन का योजन किया जाएगा।
साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन को लेकर क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों, लेखकों और बुद्धिजीवियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आयोजकों के अनुसार यह सम्मेलन बस्तर अंचल के वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ-साथ नवोदित रचनाकारों को संवाद और विचार-विनिमय का सशक्त मंच प्रदान करेगा।
यहां जारी एक विज्ञप्ति में बुधवार को बताया गया कि सम्मेलन की रूपरेखा को तीन अलग-अलग सत्रों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रत्येक सत्र की अवधि लगभग डेढ़ घंटे निर्धारित की गई है। पहले सत्र का विषय 'बस्तर का साहित्यिक वातावरण' रखा गया है, जिसमें बस्तर क्षेत्र में रचे जा रहे समकालीन साहित्य, स्थानीय रचनाकारों की भूमिका और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इस सत्र के माध्यम से बस्तर की साहित्यिक पहचान और उसकी वर्तमान दिशा पर प्रकाश डाला जाएगा।
दूसरा सत्र बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को समर्पित रहेगा। 'वाचिक परंपराओं में लोक कथाओं का महत्व' विषय पर केंद्रित इस सत्र में पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रूप से चली आ रही लोक कथाओं, मिथकों और जनश्रुतियों पर विमर्श होगा। वक्ता यह बताएंगे कि किस तरह लोक कथाएं बस्तर की सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखे हुए हैं।
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