, Dec. 17 -- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सेल्वाराज वी ने कहा कि गरीबों के पास भोजन नहीं है, काम नहीं मिलने से वे क्या खायेंगे, उनके पास पैसे नहीं हैं, काम न मिलने से वे कपड़े, चप्पलें और दवाइयां कैसे खरीदेंगें ? बच्चों के लिए दूध नहीं है, मां रोयेंगी। उन्होंने पूछा कि गरीबों को रोजगार की गारंटी छीन कर सरकार क्या संदेश देना चाहती है, इसे लाने वाले लोगों के दिल में गरीबों के लिए प्रेम नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक गरीबों के हितों के बिल्कुल विरुद्ध है, वह इसका विरोध करते हैं।

कांग्रेस के बेन्नी बेहनान ने कहा कि इस तरह का विधेयक लाना भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा है। गांधी जी गरीबों के बारे में सोचते थे, राष्ट्रपिता की सोच के अनुरूप ही कांग्रेस सरकार मनरेगा कानून लायी थी, जिसे यह सरकार खत्म कर रही है। गरीब देख रहे हैं, वे माफ नहीं करेंगे।

शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि मनरेगा को समाप्त करने के बाद सरकार गरीबों को चैरिटी पर लायी है। केन्द्र सरकार धीरे-धीरे राज्यों को धन देना कम करती जा रही है। नये विधेयक के प्रावधान के अनुसार 40 प्रतिशत राशि राज्यों को खर्च करनी होगी, पंजाब जैसे राज्य में पहले से ही पैसा नहीं है, वह कैसे इस योजना के तहत धन दे पायेंगे। पंजाब के गरीबों को काम कैसे मिलेगा। वह इस विधेयक का विरोध करती हैं।

भाजपा के राजकुमार चाहर ने कहा कि सरकार ने यह विधेयक लाकर अच्छा काम किया है। अब गरीबों को 100 के बजाय 125 दिनों का काम मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकसित भारत का सपना पूरा करने में यह विधेयक सहायक होगा।

समाजवादी पार्टी की रुचि वीरा ने कहा कि शब्द बदलने से हकीकत नहीं बदलती, सरकार ने इस विधेयक का नाम बदल कर सच्चाई नहीं बदल सकती। अब गरीबों के लिए राज्यों को 40 प्रतिशत राशि देनी होगी, जिसे देने में वे सक्षम नहीं होगे। इससे गरीबों का राेजगार मारा जायेगा। सरकार ने इस विधेयक में गांधी जी का नाम ही नहीं मिटाया है, उनके विचाराें की भी हत्या की है।

जनता दल (यू) की लवली आनंद ने कहा कि नीतियों काे समय के साथ विकसित होना जरूरी है। यह विधेयक मनरेगा को खत्म नहीं करता, उसे और अच्छा करने का प्रयास करता है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (एमएल) (एल) के राजा राम सिंह ने कहा कि सरकार यह विधेयक लाकर गरीबों के लिए जवाबदेही लेने से इन्कार कर रही है। मनरेगा गरीबों को उचित आमदनी का साधन है। वह गरीबों के लिए रोजगार के लिए 200 दिन करने की मांग करते हैं।

कांग्रेस के प्रणीति शिंदे ने कहा कि सरकार महापुरुषों के नाम बदलना चाहती है, बदल दे, एक दिन जनता इस सरकार की सत्ता की मगरूरी को समाप्त कर देगी। मनरेगा कोविड काल में गरीबों को आजीविका का आधार बनी थी। यह विधेयक मनरेगा का विकल्प नहीं है।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि यह विधेयक मनरेगा काे खत्म करने की खतरनाक साजिश है। गरीबों के लिए रोजगार के दिन 150 करने चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल का मनरेगा का बकाया के पैसे देने की सरकार से मांग की।

आल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मनरेगा को समाप्त करने से इस देश का गरीब भूखों मर जायेगा। यह सरकार तानाशाह की तरह शासन चलाना चाहती है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के लागू होने के बाद बिहार जैसे राज्य से पलायन और बढ़ जायेगा।

निर्दलीय राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि महंगाई बढ़ गयी है, ऐसे समय में मजदूरों-गरीबों से काम छीनने की साजिश की जा रही है। देश में 120 करोड़ लोग गरीब हैं, गरीबों को काम न मिलने से वे कैसे गुजारा कर पायेंगे। बिहार के सीमांचल, कोसी, मिथिलांचल से चार करोड़ लोग रोजी-रोटी के लिए पलायन करते हैं। गरीबों को काम न मिलने से पलायन बढ़ेगा। वह सरकार से आग्रह करते हैं कि गरीबों के अधिकारों को न छीना जाये।

चर्चा में द्रमुक के डी मलयारासन, कांग्रेस के एस के राघवन ,जनासेना पार्टी के बालाशोरी वल्लभनेनी ने भाग लिया।

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