, Dec. 17 -- समाजवादी पार्टी के नरेश चन्द्र उत्तम पटेल ने कहा कि यह विधेयक रोजगार की गारंटी नहीं, कोटा सिस्टम लायेगा, जबकि मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए रोजगार का अधिकार देता था। राज्य जब अपने हिस्से का 40 प्रतिशत नहीं दे पायेंगे, तो केन्द्र भी अपना 60 प्रतिशत का अंशदान नहीं देगा। ऐसी स्थिति में गरीबों काे रोजगार कैसे मिलेगा।

उन्होंने कहा कि देश में जब भी कोई विदेशी आता है, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर जाता है, विदेशों में जब प्रधानमंत्री जाते हैं, तो वहां उनके लिए महात्मा गांधी के देश से आने जैसी बातें की जाती हैं। सरकार ने इस विधेयक से अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का नाम हटाकर उचित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पहले ही मजदूरों के करोड़ाें रुपये बकाया हैं, वह कैसे मिलेंगे। अब विधेयक के प्रावधान बदले जा रहे हैं जिससे राज्यों के लिए अनेक दिक्कतें पैदा होंगी। उन्होंने कहा कि वह इस विधेयक का विरोध करते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा कि बिना किसी विचार-विमर्श के लिए यह विधेयक लाया गया है। राष्ट्रपिता मोहन दास करमचंद गांधी को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि दी थी। सरकार ने विधेयक से महात्मा गांधी का नाम हटा कर गुरुदेव और राष्ट्र पिता का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि पहले ही सरकार ने मनरेगा के तहत राज्यों का पैसा रोक रखा है और अब इस विधेयक के माध्यम से 40 प्रतिशत राशि की देनदारी राज्यों पर डाल दी है। इससे बड़ी दुश्वारियां उत्पन्न होगी। गरीबों को रोजगार के लाले पड़ जायेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मनरेगा की बकाया राशि के लिए अनेक बार पत्र लिखे हैं लेकिन केन्द्र सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। उन्होंने अन्य सांसदों के साथ ग्रामीण मंत्रालय के समक्ष धरना दिया, तो उन्हें गाड़ियों में भरकर थाने ले जाया गया। वह इस विधेयक का पुरजोर विरोध करती हैं।

द्रमुक की कनिमोझी ने कहा कि सरकार हर विधेयक का नाम अंग्रेजी, हिन्दी या संस्कृत में रखती है, लेकिन किसी विधेयक का नाम तमिल, कन्नड, मलयालम, तेलुगू या मराठी में क्यों नहीं रखती। इस विधेयक के नाम में हिन्दी और अंग्रेजी का उपयोग किया है। सरकार तमिल के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक गरीबों के हितों के विरुद्ध है। इस विधेयक में प्रावधान है कि राज्यों को 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी देनी पड़ेगी। इस तरह केन्द्र सरकार अपनी जिम्मेदारी कम करती जा रही है। सरकार हर विधेयक के माध्यम से राज्यों के राजस्व और अधिकारों को कम करती जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए कि विधेयक से महात्मा गांधी का नाम हटा दिया गया है। वह इस विधेयक का कड़ा विरोध करती हैं।

जनता दल (यू) दिलेश्वर कामैत ने कहा कि यह विधेयक किसान और राष्ट्र हित में है। इसमें ग्रामीण बेरोजगारों को वर्ष में 100 से बढ़ाकर 125 दिन रोजगार की व्यवस्था की गयी है। यह विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए लाया गया है। वह विधेयक का समर्थन करते हैं।

तेलुगू देशम पार्टी के लवू श्री कृष्ण देवरायलु ने कहा कि विधेयक में परिवर्तन गरीबों के हितों को लेकर किया गया है। कई सिफारिशों को ध्यान में रखकर यह विधेयक लाया गया है। उन्होंने इस योजना के तहत कराये जाने वाले कार्यों का सामाजिक लेखा परीक्षण कराये जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं।

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