, Dec. 17 -- कांग्रेस के एम के राघवन ने कहा कि इस विधेयक की मूल प्रकृति को बदल दिया गया है इसलिए वह इस विधेयक का विरोध करते हैं। सरकार को बताना चाहिए कि क्या महात्मा गांधी से नफरत की वजह से मनरेगा का नाम बदला गया है। महात्मा गांधी से डरते हैं इसलिए आप उनके नाम को भुलाना चाहते हैं। महात्मा गांधी की स्मृति भाजपा को सताती रहती है। मनरेगा एक क्रांतिकारी नीति थी जिससे करोड़ों लोगों को लाभ हुआ लेकिन इसे अब समाप्त किया जा रहा है। इस विधेयक में मनरेगा की पूरी भावना को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने राज्यों पर चालीस प्रतिशत हिस्सा देने का प्रावधान किया जा रहा है जो बिल्कुल सही नहीं है। यह ग्राम स्वराज पर भी हमला करने वाला है। इसे स्थाई समिति के पास भेजा जाना चाहिए।
भाजपा की मालविका देवी ने कहा कि इस विधेयक में अन्याय को बदलने का काम किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लगातार रोजगार बढाया जा रहा है। इस विधेयक से स्थानीय रोजगार को बढावा देने वाला है। अब सौ दिन की बजाय एक सौ पचीस दिन की रोजगार की गारंटी होगी। यह भागीदारी को स्थापित करता है शोषण को नहीं। सरकार किसानों के बारे में भी सोच रही है जो सराहनीय कदम है।
समाजवादी पार्टी के बाबू सिंह कुशवाहा ने कहा कि यह विधेयक मनरेगा को पिछले दरवाजे से कमजोर करने वाला है। मनरेगा काम पाने का कानूनी अधिकार था जिसे अब खत्म किया जा रहा है। इसमें एक सौ पचीस दिन के काम का वादा किया जा रहा है जबकि अब तक पचास से पचपन दिन का ही मनरेगा मजदूरों को काम मिल पा रहा है। यह संघीय ढांचे के विरूद्ध है और राज्यों पर वित्तीय बोझ डाला गया है। मनरेगा में सुधार की जगह पूरी योजना का नाम बदलना सिर्फ राजनीतिक दिखावा है।
माकपा के एस वेंकटेशन ने कहा कि इस विधेयक से रोजगार की गारंटी को हटा दिया गया है। सामाजिक सुरक्षा की योजना को सेवा की योजना बना दिया गया है। राज्यों के आर्थिक अधिकार को इससे निकाल दिया गया है।
निर्दलीय विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल ने कहा कि किसी योजना में महात्मा गांधी का नाम होने से लोगों को भरोसा होता है लेकिन उसे भी खत्म कर दिया गया है। मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम क्यों निकालना चाहता है। इस विधेयक में कहा गया कि केंद्र तय करेगा कि किस गांव में क्या काम किया जाएगा यह संघीय ढांचे के खिलाफ है।
कांग्रेस के तारिक अनवर ने कहा कि सरकार इस विधेयक को सुधार कह रही है लेकिन योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना क्या सुधार है। जो सरकार उद्योगपतियों के हजारों करोड़ माफ कर सकती है उसे मजदूरों की मजदूरी देने में तकलीफ होती है। मनरेगा योजना गरीब को आत्म सम्मान देने का काम करती थी और मौजूदा सरकार को यह पसंद नहीं है। विधेयक राज्यों की भूमिका कम करता है और पंचायतों को कमजोर करता है। यह विधेयक नफरत की राजनीति को उजागर करता है।
भाजपा के डा. हेमंत विष्णु सवरा ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य आजीविका की सुरक्षा को बढाना और ग्रामीण व्यवस्था को सुदृढ करना है। इस विधेयक के माध्यम से अब मजदूरों को एक सौ दिन की बजाय 125 दिनों का रोजगार मिलेगा। विपक्ष किस आधार पर इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वह समझ से परे हैं। इसमें ग्राम पंचायतों को मजबूत करने वाला है। इस विधेयक में महिलाओं के सुदृढीकरण करने का प्रावधान किया गया है।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम पर जो योजना थी उसे बदलने की क्या आवश्यकता है। सरकार अहंकार में इस विधेयक को लेकर है जो गरीब विरोधी है। भाजपा मनरेगा जैसी कल्याणकारी योजना को समाप्त करना चाहती है। मनरेगा के तहत सौ दिनों की गारंटी की योजना थी लेकिन अब इस गारंटी को खत्म किया जा रहा है। यह रोजगार गांरटी को खत्म करने की योजना है जिससे करोड़ों लोगों को नुकसान होगा। सरकार को इस विधेयक को वापस लेना चाहिए।
राष्ट्रवादी लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मनरेगा से गांव औऱ गरीबों को फायदा मिल रहा था। देश के कई मजदूर संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है। यह संविधान की मूल भावना का विरोधी है। कानूनी रोजगार की गारंटी थी पहले लेकिन अब इसे खत्म कर दिया गया है। इस विधेयक में सरकार ने राज्यों पर वित्तीय बोझ डाल रही है। इससे गरीब राज्यों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।
आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के एडवोकेट चंद्रशेखर ने कहा कि रोजगार गारंटी यहां के गरीबों का हक है। सरकार मनरेगा को हटाकर नया कानून लेकर आ रही है। राज्यों पर पहले से ही कर्ज है तो क्या वह इस योजना पर कैसे चालीस फीसदी खर्च वहन कर सकते हैं। मजदूरों की मजदूरी बढाकर पांच सौ रुपये किया जाना चाहिए। हर पंचायत में पचास फीसदी काम महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाये। सरकार को सबके हितों को ध्यान रखना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
निर्दलीय अब्दुल रशीद शेख ने कहा कि नाम बदलना सरकार का अधिकार है। उन्होंने कहा कि भगवान राम को बदनाम न किया जाय। वह सबके हैं। भगवान राम के नाम का दुरुपयोग न किया जाये।
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