पटना , अप्रैल 18 -- िश्व धरोहर दिवस के अवसर पर शनिवार को कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा बिहार विरासत विकास समिति के संयुक्त तत्वावधान में"समकालीन पुरातात्विक उत्खनन" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बिहार संग्रहालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन बिहार विरासत विकास समिति के कार्यपालक निदेशक कृष्ण कुमार, सांस्कृतिक कार्य की निदेशक रूबी, पद्मश्री प्रो. बुद्ध रश्मि मणि, पूर्व कुलपति, भारतीय विरासत संस्थान, नई दिल्ली, प्रो सिद्धार्थ सिंह, कुलपति, नव नालंदा महाविहार, नालंदा, प्रो. अनिल कुमार, विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, विश्व भारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन तथा डॉ. रजत सन्याल, विभागाध्यक्ष, पुरातत्व विभाग, कोलकाता विश्वविद्यालय ने किया।
इस दौरान "रीससिटेशन ऑफ श्रीमद् धर्म विहार(द फॉरगॉटन हिलटॉप मोनास्ट्री ऑफ गंगा वैली : एक्सकवेशन रिपोर्ट ऑफ लाल पहाड़ी 2017-2021)" पुस्तक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक लाल पहाड़ी उत्खनन पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध कार्य है, जिसका लेखन प्रो. अनिल कुमार ने तथा संपादन डॉ. अमित रंजन ने किया है। यह प्रकाशन बौद्ध मठीय परंपराओं के इतिहास को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है।
पद्मश्री प्रो. बी.आर. मणि ने अपने व्याख्यान में सारनाथ उत्खनन (2013-14) के नवीन साक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन खोजों ने सारनाथ के ऐतिहासिक महत्व को और सुदृढ़ किया है तथा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने की संभावनाओं को बल मिला है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैज्ञानिक उत्खनन के माध्यम से इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाया जा सकता है, जिनके लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं होते। उन्होंने बिहार के अन्य पुरातात्विक स्थलों को भी विश्व धरोहर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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