नयी दिल्ली , मार्च 16 -- देशभर के मुक्त (डिनोटिफाइड), घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों (एनटी-डीएनटी) के प्रतिनिधियों ने सोमवार को यहां आयोजित राष्ट्रीय बैठक में जनगणना में अलग कॉलम और विशिष्ट जातिगत कोड शामिल करने की मांग की है।

समुदाय के नेताओं ने बैठक के बाद बाद संवाददाता सम्मलेन में "डीएनटी-एनटी फेडरेशन ऑफ इंडिया" के गठन की घोषणा की गयी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग को नजरअंदाज किया गया तो देशभर में लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेंगे।

संवाददाता सम्मेलन में पूर्व आयोग अध्यक्ष बालकृष्ण सिदराम रेणके, दिगंबर राठोड, लालजी राईका, एसपी सिंह लबाना, गोपाल केशवत, डॉ. अभय जाधव और दीपा पवार सहित कई प्रतिनिधि मौजूद रहे। नेताओं ने बताया कि 14-15 मार्च 2026 को दिल्ली में आयोजित घुमंतू-विमुक्त परिषद में देश के 22 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और एक साझा राष्ट्रीय मंच बनाने का निर्णय लिया।

समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि डिनोटिफाइड और घुमंतू समुदायों की सही गणना के बिना उनकी वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती। कई समुदाय आज भी सरकारी आंकड़ों में ठीक से दर्ज नहीं हैं, जिसके कारण नीति-निर्माण के दौरान उनकी समस्याएं नजरअंदाज हो जाती हैं।

प्रतिनिधियों ने सरकार से कई अन्य मांगें भी रखीं, जिनमें- सरकारी नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में 10 प्रतिशत आरक्षण, भटके-विमुक्त परिवारों को भूमि अधिकार और स्थायी आवास, समुदायों के खिलाफ होने वाले अपराधों में कानूनी और संवैधानिक संरक्षण, एनटी-डीएनटी समुदायों के विकास के लिए स्वतंत्र और पर्याप्त बजट प्रावधान शामिल हैं।

इस अवसर पर बालकृष्ण सिदराम रेणके ने 2005 में गठित डिनोटिफाइड और घुमंतू जनजातियों पर राष्ट्रीय आयोग की सिफारिशों का जिक्र किया। आयोग ने 2008 में अपनी रिपोर्ट में बताया था कि देश की 10 प्रतिशत से अधिक आबादी इन समुदायों से जुड़ी है और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहद पिछड़ी हुई है।

आयोग ने जनगणना में स्वतंत्र गणना, पहचान पत्रों की उपलब्धता और शिक्षा-रोजगार के लिए विशेष योजनाएं शुरू करने की सिफारिश की थी। लेकिन प्रतिनिधियों का कहना है कि इन सिफारिशों का अब तक पूर्ण रूप से क्रियान्वयन नहीं हुआ है, जिसके कारण ये समुदाय विकास की मुख्यधारा से बाहर हैं।

एसपी सिंह लबाना ने कहा कि जनगणना में पहचान न होने के कारण ये समुदाय अक्सर सरकारी नीतियों और विकास योजनाओं से बाहर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि सही पहचान और गणना की है।

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