इंफाल , अप्रैल 03 -- टोक्यो से नयी दिल्ली जा रही एयर इंडिया की एक उड़ान में एक युवती की बिगड़ती तबियत सुधारने में उस समय कामयाबी मिली जब मणिपुर की एक चिकित्सा विशेषज्ञ ने समय पर इलाज के लिए आगे आकर उसकी मदद की और उसकी जान बचाई।

डॉ. लोनी लिरिना ने हवा में ही 21 साल की एक युवती की जान बचाने में अपनी सूझ बूझ का इस्तेमाल किया और महिला की जान बच गयी। मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद ने उनकी विशेषज्ञता के लिए उन्हें बधाई दी।

डॉ. लोनी लिरिना ने बताया कि यह घटना 28 फरवरी, 2026 को उड़ान संख्या एआई357 में हुई थी। यात्रा के लगभग आठ घंटे बाद केबिन क्रू ने मेडिकल आपातस्थिति की घोषणा की और यात्रियों में मौजूद योग्य मेडिकल पेशेवरों से मदद मांगी।

इंफाल के बबीना स्पेशलिटी हॉस्पिटल में अमेरिकन ऑन्कोलॉजी इंस्टीट्यूट की चिकित्सा देखभाल चिकित्सक डॉ. लोनी लिरिना ने एक विदेशी डॉक्टर के साथ मिलकर 21 साल की उस यात्री का इलाज किया जिसने सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी।

उस युवती को बचपन से ही अस्थमा की तकलीफ थी लेकिन वह कई सालों से इसकी कोई दवा नहीं ले रही थी। जांच करने पर पाया गया कि मरीज को सांस लेने में बहुत अधिक तकलीफ हो रही थी। उसके दिल की धड़कन 160 बीट्स प्रति मिनट से अधिक थी। रक्तचाप कम था और वहां की हवा में ऑक्सीजन सैचुरेशन 80 प्रतिशत था।

डॉ. लिरिना ने इस स्थिति को 'एक्यूट अस्थमा अटैक' के तौर पर पहचाना और तुरंत फ्लाइट में मौजूद सीमित मेडिकल संसाधनों का इस्तेमाल करके इमरजेंसी इलाज शुरू किया। इसमें ऑक्सीजन सपोर्ट, नेबुलाइजेशन और जरूरी दवाएं शामिल थीं। उनके तुरंत दखल से 30 मिनट के अंदर ही मरीज की हालत स्थिर हो गई।

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