पटना , जनवरी 29 -- 'द सोशल साइट' स्वतंत्र, द्विभाषी मंच 'द सोशल साइट' के मुख्य संपादक मशहूर लेखक और चिंतक शिवदयाल ने कहा कि विभिन्न सामाजिक सरोकार के मुद्दों पर लोगों के बीच साफ दृष्टि लाना इस नयी मासिक डिजिटल पत्रिका का उद्देश्य है।

मुख्य सम्पादक ने कहा कि राजनीतिक और धर्मिक विषयों पर बोलने और उसे विश्लेषित करने के लिए पत्रिकाएं और प्लेटफ़ॉर्म उपलब्ध हैं लेकिन कहीं न कहीं सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं को उस तरह का आकर्षण नही मिल पाता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफोर्म पर प्रकाशित यह मासिक पत्रिका द सोशल साइट (सामजिक दृष्टि) ऐसी ही बौद्धिक कमी को पूरा करने के लिए एक पहल है। उन्होंने कहा कि यह प्रत्रिका समाज, सत्ता, क़ानून, अर्थव्यवस्था, संस्कृति, विज्ञान और सभ्यता पर गंभीर लेखन के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में गहन लेख प्रकाशित होंगे, जिससे, सार्थक सार्वजनिक बहस की शुरुआत संकीर्ण भाषाई दायरों से बाहर निकल पायेगी।

श्री शिवदयाल ने कहा कि उनके सम्पादन में वर्ष 2000 से लेकर 2016 तक 'सहयात्री' नाम की एक पत्रिका प्रकशित हुई थी, जिसका हर अंक किसी ज्वलंत प्रश्न पर विचार करता था। उन्होंने कहा कि 'गरीबी' और 'पानी' जैसे विषयों पर प्रकशित 'सहयात्री' के अंक बहुत सराहे गये थे। उन्होंने कहा कि 'द सोशल साइट' उसका 'रेपलिका' भले नही हो, लेकिन मूल उदेश्य मिलते जुलते हैं।

उल्लेखनीय है कि पटना के कुछ प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों ने मिल कर इस डिजिटल मासिक पत्रिका की शुरूआत की है। इसके प्रधान संपादक हार्वड से शिक्षित अर्थशास्त्री शशिभूषण, कार्यकारी संपादक सेवानिवृत्त उपनियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक अरुण कुमार सिंह तथा मुख्य संपादक और हिंदी संस्करण के प्रधान प्रसिद्ध लेखक एवं चिंतक शिव दयाल हैं। इस पत्रिका से मशहूर पत्रकार और कवि अनिल विभकार, प्रियंका और रोहित कुमार जैसे बुद्धिजीवियों के नाम जुड़े हुए हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित