नयी दिल्ली , मार्च 27 -- राज्यसभा में शुक्रवार को वित्त विधेयक, 2026 ओर विनियोग (संख्या-2) विधेयक, 2026 पर एक साथ चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर बजट में जरूरतमंदों की अनदेखी करने का आरोप लगाया जबकि सत्तापक्ष ने कहा कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है।

गुजरात से कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि वित्त विधेयक में सरकार ने जरूरतमंदों, किसानों और महिलाओं का ध्यान नहीं रखा है। वित्त वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के हवाले से उन्होंने कहा कि जहां आयकर के प्राप्त राजस्व 26 प्रतिशत बढ़ा था वहीं सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात में कॉरपोरेशन कर में कमी आयी है। इसका मतलब है कि कर का बोझ आम लोगों पर डाला जा रहा है और उद्योगों को राहत दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि वित्त विधेयक में साल 2047 तक गुजरात के गांधीनगर स्थित गिफ्टी सिटी को कर में छूट दी गयी है, जहां बड़े-बड़े लोग रहते हैं, लेकिन आम लोगों की, किसानों और महिलाओं को कोई राहत नहीं दी गयी है।

कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए श्री गोहिल ने आरोप लगाया कि सरकार उपकर और अधिभार लगाकर घोषित उद्देश्य से इतर उसका इस्तेमाल कर रही है।

भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि भारत इस समय सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन गया है। आज पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिये गये हैं जबकि भारत में उत्पाद शुल्क कम करके इनके दाम नहीं बढ़ने दिये गये हैं। यह दिखाता है कि सरकार आम लोगों की चिंता कर रही है।

उन्होंने कहा कि आयकर देने वालों की संख्या बढ़ रही है जो सरकार में लोगों के विश्वास को दिखाता है। सरकार ने "कर आतंकवाद" को समाप्त कर व्यवसायियों को कर मुक्त किया है।

तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि उत्पाद शुल्क में कटौती इसलिए की गयी है कि क्योंकि चार राज्यों में चुनाव हैं। यदि सरकार आम लोगों के बारे में सोचती तो पिछले चार साल से रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल की खरीद का लाभ उन्हें देती जो नहीं किया गया। उन्होंने वित्त मंत्री से इस बात का आश्वासन मांगा कि चुनाव समाप्त होने के बाद भी पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं बढ़ायी जायेगी।

उन्होंने संसद का सत्र होने के बावजूद प्रधानमंत्री के बयान जारी करने के बाद संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा न करने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इतनी ही चिंता होती तो रसोई गैस सिलेंडर के दाम 60 रुपये नहीं बढ़ाये जाते।

तमिलनाडु से द्रमुक के पी. विल्सन ने कहा कि बजट में आर्थिक असमानता कम करने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। एक तरफ धनाढ्य लोगों की संपत्ति बढ़ रही है और दूसरी तरफ भुखमरी की रैंकिंग में भारत लगातार नीचे गिर रहा है। खाद्य सब्सिडी, ईंधन पर सब्सिडी और उर्वरक सब्सिडी कम की जा रही है। उन्होंने कहा कि गरीब कल्याण पर खर्च कम करके और आम लोगों पर बोझ डालकर राजकोषीय घाटा कम करना गलत है। उन्होंंने कहा कि देश की आम गृहणी राजकोषीय घाटे का आंकड़ा नहीं देखती, वह चावल की कीमत देखती है।

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