जयपुर , अप्रैल 19 -- राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष पर महिलाओं के हक के खिलाफ होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी ओछी राजनीति के चलते देश की करोड़ों माताओं बहनों के अरमानों पर पानी फिर गया।

श्री शर्मा रविवार को यहां पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश कार्यालय में संविधान संशोधन विधेयक2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक पर विपक्ष के रवैए पर जमकर प्रहार करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला शक्ति को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के लिए ये विधेयक लाए और इन विधेयकों के प्रति कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा जैसे दलों ने इसका समर्थन न करके महिलाओं की आकांक्षाओं और अधिकारों के प्रति अपनी उदासीनता जगजाहिर कर दी।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने स्वार्थ की राजनीति से इसे एक काला पृष्ठ बना दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दलों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोककर महिलाओं का अपमान किया और फिर इस जीत का जश्न भी मनाया। यह लोकतंत्र के इतिहास में शर्मनाक पल था। यह विपक्ष के असली चेहरे को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने ओबीसी महिला, परिसीमन एवं दक्षिण भारत के नाम पर भ्रम फैलाया ताकि क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काया जा सके और असली मुद्दे से ध्यान हटाया जा सके जबकि वास्तविकता यह है कि सीटों की संख्या बढ़ने पर सभी राज्यों को समुचित प्रतिनिधित्व मिलता।

श्री शर्मा ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदारी से बोलने के बजाय हल्की स्तर की टिप्पणी करते हुए नजर आए। ममता बनर्जी और उनकी पार्टी खुद को महिलाओं की हितैषी बताती है लेकिन संसद में उनका रुख इसके बिल्कुल विपरीत रहा। विधेयक को लेकर संसद में जो हुआ, उसने न केवल भारत के लोकतंत्र को, बल्कि देश की आधी आबादी हमारी माताओं-बहनों के सपनों को गहरी चोट पहुंचाई है। भारत के संसदीय इतिहास में 17 अप्रैल का दिन एक नए अध्याय के रूप में जुड़ सकता था।

उन्होंने कहा कि सबसे शर्मनाक बात यह है कि यही दल महिला सम्मान का ढोंग करते हैं, लेकिन जब संसद में महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व देने का समय आया तो विरोध में खड़े हो गए। कांग्रेस ने हमेशा नारी सम्मान की केवल बातें की हैं, लेकिन जब अधिकारों को संवैधानिक धरातल पर उतारने का समय आया, तो उन्होंने मामले को ठंडे बस्ते में डालने की पुरानी रणनीति अपनाई। कांग्रेस ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। शाहबानो केस और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर भी कांग्रेस का रुख महिलाओं के खिलाफ रहा है।

विपक्ष ने राष्ट्रहित के बजाय राजनीतिक स्वार्थ को प्राथमिकता दी। इन्होंने साबित कर दिया कि इनके लिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ चुनावी नारा है, नीयत नहीं। नारी शक्ति अधिनियम ही नहीं, विपक्ष ने इससे पहले सीएए का विरोध किया, इन्होंने सेना का अपमान किया। विपक्ष ने अपने राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक को देश और समाज के हित से ऊपर रखा है। नारी शक्ति इस विश्वासघात को भूलेगी नहीं और समय आने पर इसका जवाब जरूर देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पहल का समर्थन करने की अपील की थी वहीं गृहमंत्री, संसदीय कार्य मंत्री ने स्वयं सभी सदस्यों से दलगत भावना से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की लेकिन विपक्ष हमेशा की तरह नारी शक्ति के विरोध मे खड़ा रहा। मोदी जी का सपना है कि विधानसभा से लेकर संसद तक हमारी मातृशक्ति का नेतृत्व हो। 'नारी शक्ति वंदन' केवल बिल नहीं, बल्कि विकसित भारत के संकल्प का आधार है।

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