नयी दिल्ली , दिसंबर 16 -- विपक्ष के विरोध के बीच सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन विधेयक) 2025 मंगलवार को लोकसभा में पेश किया गया ।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे पेश किया लेकिन विपक्षी सदस्याें ने इसे संविधान विरोधी बताते हुए इसे पेश नहीं किये जाने की मांग की।
रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक पेश किये जाने का विरोध करते हुए कहा कि पहले ही बीमा संशोधन में इतने संशोधन किये गये हैं इसलिए इसकी आवश्यकता नहीं है। सरकार को बताना चाहिए कि किस प्रयोजन से इसे सदन में रखा जा रहा है। इस विधेयक का शीर्षक ऐसा होना चाहिए जिससे विधेयक के प्रावधान पता चले। क्या यह विधेयक शत प्रतिशत लोगों की मदद कर रहा है। इससे एलआईसी एजेंटों की संख्या कम की गयी है। यह लोगों के हित में नहीं है। अनुच्छेद 348 साफ साफ बताता है कि जितने भी विधेयक आयेंगे वह अंग्रेजी भाषा में आयेंगे और हिन्दी में इसका प्रयोग उसके पूरक के रूप में किया जाएगा, लेकिन यह उसके खिलाफ है।
द्रमुक की टी सुमति ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह संविधान के साथ साथ देश की अखंडता के खिलाफ है। यह राष्ट्रहित में नहीं है। इस विधेयक से बीमा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी को दिक्कतें आ सकती है।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने विधेयक के पेश करने का विरोध करते हुए कहा कि यह विधेयक का हिंदीकरण का उदाहरण है। इससे हिंदी को स्थापित किया जा रहा है। विधेयक का नाम नारे के रूप में नहीं होना चाहिए। अब बीमा क्षेत्र सौ प्रतिशत विदेशी कंपनियों को देने का प्रावधान किया जा रहा है जिससे काॅरपोरेट को फायदा होगा।
द्रमुक के टी एम सेल्वागणपति ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि समस्या का मर्म यही है कि विधेयकों और योजनाओं का नाम हिंदी में करते हैं। यह विधेयक संविधान के कल्याणकारी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने वाला है इसलिए इस विधेयक को वापस लेना चाहिए।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम ) के चंद्रशेखर ने कहा कि विधेयक संविधान के अनुरूप नहीं है इसलिए इसे वापस लिया जाना चाहिए। यह संघीय ढांचे का उल्लंघन है। यह राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का काम करेगा।
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