नई दिल्ली , दिसंबर 12 -- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार आलोक चंद्रा ने शुक्रवार को कहा कि नई श्रम संहिताओं को लागू किया जाना सहज आपूर्ति शृंखला, कौशल विकास की बेहतर सुविधा और सभी पेशों के श्रमिकों के लिए नियमानुसार वेतन सुनिश्चित करने का प्रयास है ।
श्री चंद्रा ने यहां फिक्की में अखिल भारतीय नियोक्ता संघ (एआईओई) की 91वीं वार्षिक आम बैठक और वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कि 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार एकीकृत संहिताओं में समेकित करने से वे नियामक विसंगतियाँ समाप्त होंगी, जो लंबे समय से औद्योगिक दक्षता में बाधक थीं।
उन्होंने कहा कि " यदि उत्पादन की सभी कड़ियों से संबंधित जोखिमों की परिभाषाओं तथा सुरक्षा मानकों में सामंजस्य हो तो उससे इससे एक बहुत ही सुचारु आपूर्ति शृंखला का विकास संभव होगा।" उन्होंने कहा कि कौशल-विकास के क्षेत्र में, सरकार ने रीस्किलिंग ( पुनर्कौशल-निर्माण) के लिए एक विशेष कोष बनाया है। इसमें श्रम संबंधी कानूनों के उल्लंघन के मामलों में जुर्माने से जमा होने वाली राशि का एक हिस्सा भी शामिल होगा।
उन्होंने परिचर्चा में क्षेत्रीय वेतन असमानताओं को लेकर उठे प्रश्नों के जवाब में कहा कि नयी संहिताओं में वेतन सुधारों को श्रमिक सुरक्षा का सबसे प्रमुख हिस्सा माना गया है तथा न्यूनतम वेतन को सभी क्षेत्रों में सार्वभौमिक कर दिया गया है। इससे पहले के 45 अनुसूचित रोजगारों की प्रणाली समाप्त हो गई है। इसके साथ एक न्यूनतम प्राथमिक वेतन का प्रावधान किया गया है जिससे कोई राज्य सरकार केंद्रीय स्तर पर तय न्यूनतम प्रथमिक वेतन से नीचे वेतन तय नहीं कर सकेगी जबकि जहां वेतन दरें पहले से ऊंची हैं वे यथावत बनी रहेंगी।
श्री चंद्रा ने कहा, '' न्यूनतम प्रारंभिक वेतन की यह व्यवस्था बड़ी सीमा तक समानता के मुद्दे का समाधान करती है।"उन्होंने कहा कि विनियामक ढांचे में मानकीकरण से आपूर्ति शृंखला से जुड़े लाभ प्राप्त होंगे। सभी चार संहिताओं में प्रमुख शब्दों की परिभाषाओं का मानकीकरण किया गया है और सुरक्षा संबंधी विनियमन के लिए राष्ट्रीय मानक स्थापित किए गए हैं, जिससे 1923 से अलग-अलग बनाए गए कानूनों से उत्पन्न विखंडन समाप्त होगा।
कार्यक्रम में एआईओई के अध्यक्ष तथा एम्बर एंटरप्राइजेज के अधिशासी चेयरमैन एवं सीईओ जसबीर सिंह ने कहा कि इन संहिताओं में "एक संतुलित ढांचा जो उद्यमों और श्रमिकों दोनों का समर्थन करता है।" उन्होंने कहा कि नियोक्ताओं को सरल अनुपालन और कम नियामक बोझ का लाभ मिलेगा, जबकि श्रमिकों को विस्तारित सामाजिक सुरक्षा, मजबूत सुरक्षा उपाय और उभरते कार्य मॉडल-जैसे गिग और प्लेटफ़ॉर्म कार्य-की औपचारिक मान्यता प्राप्त होगी।
उन्होंने इन संहिताओं के सहज अनुमालन और क्रियान्वयन के लिए सहयोगी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया, जिनमें राज्य-स्तरीय एकरूपता, एमएसएमई के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन, एकीकृत डिजिटल अनुपालन प्रणाली को मजबूत करना तथा क्षमता-निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं।
अंतराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ ) की भारत के मामलों के प्रभारी अधिकारी रवि पिरीस ने कहा कि ये संहिताएँ "एक स्थायी औद्योगिक संबंध प्रणाली की मजबूत नींव" बनाती हैं, जो समानता और दक्षता के बीच संतुलन स्थापित करती हैं। उन्होंने कहा, "भारत ने गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को कवरेज प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई है और यह श्रमिक बाजार में असंगठित तौर तरीकों को समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।"कार्यक्रम में सार्वजनिक उपक्रमों के स्थायी मंच स्कोप महानिदेश तथा आईएलओ की संचालन परिषदके सदस्य अतुल सोबती ने कहा, "हम संघर्ष, विवाद और टकराव के युग से संवाद, परामर्श और सहयोग के युग में आ गए हैं।" उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन, उभरती तकनीकों और कौशल-अंतर (स्किल गैप) के मानचित्रण के संदर्भ में नियोक्ताओं की पुनः कौशल-विकास में जिम्मेदारियों पर भी बल दिया।
अंतर्राष्ट्रीय नियोक्ता संगठन (आईओई), जेनेवा की निती मामलों कीनिदेशक अकुस्टीना मॉर्नी ने जी20, अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन और आईएलओ गवर्निंग बॉडी में वैश्विक श्रम विमर्श के दौरान नियोक्ता समूह का समर्थन करने में भारत की "महत्वपूर्ण और रचनात्मक भूमिका" की सराहना की।
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