नयी दिल्ली , मार्च 23 -- राज्यसभा में विपक्ष ने वित्त मंती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सोमवार को सरकार पर रुपये की विनिमय दर में गिरावट, के दाम में उछाल पर अंकुश लगाने में विफल रहने का आरोप लगाया। बजट 2026-27 के बजट से संबंधित अनुदान मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक (संख्या 2) , 2026 पर सदन में चर्चा के दौरान विपक्ष ने कहा कि बजट में रोजगार बढ़ाने का कोई स्पष्ट योजना नहीं दिखती है और सरकार ईंधन और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर सकी है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने भोजनावकाश के बाद विनियोग विधेयक (संख्या 2) , 2006 को उसी रूप में स्वीकृत कर लोक सभा को उसी रूप में लौटाने का प्रस्ताव रखा। धन संबंधी विधेयक होने के कारण राज्यसभा में इस पर चर्चा एक औपचारिकता है।

प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस के नीरज डांगी ने वर्ष 2026-27 का बजट रखे जाने के बाद वर्ष 2025-26 के लिए 2.81 लाख करोड़ रुपये की अनुपूरक अनुदान मांगों की दूसरी किस्त प्रस्तुत किये जाने का मद्दा उठाते हुए कहा कि वित्त मंत्री बजट प्रस्तुत करते हुए मुख्य मदों का व्यय प्रस्ताव कम रखती है ताकि राजकोषीय स्थिति घाटा कम दिखा कर स्थिति को मजबूत दर्शाया जा सके।

उन्होंने कहा कि रुपया लगातार गिर रहा है जिससे जरूरी चीजों के आयात की लागत बढ़ने से महंगाई का खतरा तथा विदेश में शिक्षा के लिए गऐ विद्यार्थियों का खर्च बढ गया है। निर्माण के लिए आयातित संसाधन भी मंहगे हुए है। इसका पूरा असर आम लोगों पर पड़ा है और सरकार का वृहद आर्थिक प्रबंध कमजोर दिखता है।

श्री डांगी ने सोने के भाव में भी लगतार तेजी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के लोगों की संस्कृति और परम्पराओं से जुड़ी यह धातु आम लोगों की खरीददारी की हैसियत से ऊपर चली गयी है। उन्होंने नियंत्रण से बाहर होती जा रही इन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार और आरबीआई को हस्तक्षेप करने तथा आयात शुल्क और माल एवं सेवाकर (जीएसटी) कम करने का सुझाव दिया ताकि जनता को बोझ से बचाया जा सके।

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के लेखा जोखा को गुणवत्ता की दृष्टि अपने 'सी ग्रेड' में रखा है जो चीन से दूसरा है। यह पद्धति और प्रक्रिया संबंधी कमियों का परिणाम है और इससे भारत को मिलने वाले कर्ज की जागत बढ़ जाती है और खामियाजा आम लागों को भुगतना पड़ता है।

श्री डांगी ने रसाईं गैस और पोटास तथा फासफोरस वाले उर्वरकों की कमी का अरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में हार्मूज जलडमरू मध्य से जहाजों का आवागमन प्रभावित होने से एलएनजी भी मंहगा हो गया है जिससे उर्वरकों की लागत भी बढ़ गयी है। उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी के आपूर्ति की कोई कमी नहीं होने की बात तो कर रही है लेकिन पूरा देश गैस की लाइन में लगा हुआ है। लोग रसाईं के लिए पुन: लकड़ी के युग में पहुंच गये हैं।

उन्होंने कहा कि बजट में रोजगार के अवसर बढ़ाने का कोई रोड मैपनहीं है , यह जन विरोधी बजट है। सामाजिक कल्याण की कई योजनाओं पर वास्तवित खर्च प्राय: बजट आवाटंन की तुलना में कम रहता है।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कहा कि इस समय गैस और पेट्रोलियम जैसी आयात पर निर्भर वस्तुओं की आपूर्ति पर कोई चर्चा करने से पहले खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की स्थिति का ध्यान जरूर रखा चाहिए। उन्होंने विपक्ष को बंगलादेश युद्ध के समय की याद दिलायी जब मिट्टी के तेल और चीनी तक के दायम बहुत बढ़ गये थे और कर्नाटक विधान सभा में उन्होंने उस पर चर्चा में भाग लिया था।

श्री देवगौड़ा ने कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के काम-काज पर अफसोस जताते हुए केंद्र सरकार से कर्नाटक की मदद करने , वहां सात औद्योगिक संकुलों के विकास के काम को आगे बढ़ाने तथा भद्रावती स्टील संयंत्र के उद्धार की पुरजोर अपील की।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मदन राठौर ने विपक्ष पर गैस की किल्लत का निराधार भय फैलाने का आरोप लगाया । उन्होंने कहा कि विपक्ष भारतीय अर्थव्यवस्था की पिछले दस वर्ष की तीव्र प्रगति के प्रति आंखें बंद कर बात करता है। विपक्ष को निराधार बातें कर के सदन के समय का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए ।

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