रायपुर , मार्च 10 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को वन्यजीवों की मौत, रायपुर स्मार्ट सिटी के कार्यों में कथित गड़बड़ी और शिरपुर महोत्सव के खर्च को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा हुई।
अलग-अलग मुद्दों पर मंत्रियों ने जानकारी देते हुए आवश्यक मामलों में जांच कराने का आश्वासन भी दिया। सदन में वन्यजीवों की मौत से जुड़ा मामला उठने पर वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि राज्य में पिछले तीन वर्षों के दौरान नौ बाघों और 38 हाथियों सहित कुल 562 वन्यजीवों की अस्वाभाविक मृत्यु दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि हाथियों की मौत के मामले अलग-अलग वन मंडलों में सामने आए हैं। वर्ष 2024 में सबसे अधिक 18 हाथियों की मौत दर्ज हुई, जबकि 2025 में 16 हाथियों की मृत्यु हुई। वहीं वर्ष 2026 में अब तक दो हाथियों की मौत की पुष्टि हुई है।
बाघों की मौत को लेकर मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में कुल नौ बाघों की मृत्यु हुई है। इनमें सारंगढ़-बिलाईगढ़, कोरिया, अचानकमार टाइगर रिजर्व, नंदनवन वन सफारी और अचानकमार-अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं।
रायपुर स्मार्ट सिटी परियोजना में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही उठाया। विधायक सुनील सोनी ने परियोजना में हुए खर्च और कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखने की मांग की। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत करीब 30 करोड़ रुपये के कार्य हुए हैं, जिसमें म्यूजिकल फाउंटेन पर ही पांच करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गई है।
इस मुद्दे पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धर्मलाल कौशिक ने भी गड़बड़ी के आरोप लगाए। इसके जवाब में नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि स्मार्ट सिटी के कार्यों को लेकर प्राप्त शिकायतों और आरोपों की जांच कराई जाएगी और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
वहीं सदन में शिरपुर महोत्सव के आयोजन और खर्च को लेकर भी ध्यानाकर्षण के माध्यम से सवाल उठाए गए। कांग्रेस विधायक द्वारिकाधीश यादव ने महोत्सव के आयोजन में आय-व्यय और संचालन व्यवस्था में अनियमितता का आरोप लगाया।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने जवाब देते हुए बताया कि महोत्सव के आयोजन के लिए 15 लाख रुपये का प्रावधान किया गया था और प्रचार-प्रसार पर करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए। उन्होंने कहा कि सभी खर्चों का विवरण चिन्हारी पोर्टल पर उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। हालांकि विधायक द्वारा जांच की मांग किए जाने पर मंत्री ने मामले की जांच कराने की बात कही।
विधानसभा में इन मुद्दों को लेकर हुई चर्चा के बाद सरकार की ओर से आवश्यक मामलों में जांच कराने का भरोसा दिया गया।
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