शिमला , फरवरी 18 -- हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार से निलंबित राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को बहाल करने का आग्रह करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया। उल्लेखनीय है कि सोमवार को बजट सत्र के पहले दिन विधानसभा में अपने पारंपरिक संबोधन के दौरान राज्यपाल ने संवैधानिक मुद्दों का हवाला देते हुए राज्य सरकार के उस हिस्से को छोड़ दिया था, जिसमें राजस्व घाटा अनुदान को बहाल करने का प्रस्ताव था।

राजस्व मंत्री हर्षवर्धन चौहान का केंद्र सरकार से अनुदान बहाल करने का आग्रह करने वाला प्रस्ताव बुधवार को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इससे पहले सदन में तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चर्चा का जवाब देते हुए अपनी सरकार के वित्तीय प्रबंधन का बचाव किया और विपक्ष पर राज्य के हितों को छोड़ने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान राज्य के राजस्व संग्रह में सुधार हुआ है जबकि "फिजूलखर्ची" में कटौती की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी विधायकों ने इस चर्चा से दूरी बनाई, जिससे उनका "असली चेहरा" उजागर हो गया है।

उन्होंने पिछली भाजपा सरकार पर निजी हितों के लिए सब्सिडी बांटने और 2022 के चुनावों से पहले "मुफ्त की योजनाओं" पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये खर्च करने का आरोप लगाया। इसमें डीजल पर वैट में 5 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी शामिल थी, जिससे आबकारी राजस्व में 160 करोड़ रुपये की गिरावट आई थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने शराब के ठेकों की पारदर्शी नीलामी के माध्यम से 450 करोड़ रुपये अर्जित किए और 48 वर्षों में पहली बार हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड ने 200 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। उन्होंने कहा कि पिछले शासन के दौरान ऋण का बोझ 48,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 73,000 करोड़ रुपये हो गया था।

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