चेन्नई , फरवरी 05 -- तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सीट-बंटवारे पर बातचीत करने के लिए अभी तक पैनल गठित नहीं किया है जबकि चुनावों में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं।
कांग्रेस के एक धड़े द्वारा राज्य की सत्ता में हिस्सेदारी की मांग के कारण द्रमुक स्पष्ट रूप से नाराज नजर आ रही है। पार्टी शुरूआत में कांग्रेस के साथ समझौते को लेकर इच्छुक थी, लेकिन अब उसका रुख बदलता दिख रहा है, क्योंकि उसने अपने सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे के लिए अभी तक समिति का गठन नहीं किया है।
द्रमुक अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की चुप्पी ने स्थानीय कांग्रेस नेताओं को हैरान कर दिया है, जबकि श्री स्टालिन के कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी के अच्छे संबंध हैं।
एक तरफ यदि कांग्रेस नयी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कषगम' (टीवीके) के साथ गठबंधन के लिए मुखर होना भी द्रमुक कार्यकर्ताओं को नागवार गुजरा है। कांग्रेस का यह धड़ा तर्क दे रहा है कि यह पार्टी के दीर्घकालिक हित में होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि यही कारण है कि द्रमुक सीट-बंटवारे की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने में देरी कर रही है। यह द्रमुक प्रमुख की एक रणनीति है ताकि कांग्रेस को इस महत्वपूर्ण दक्षिणी राज्य में अपनी चुनावी वास्तविकता का एहसास हो सके।
अपनी ओर से द्रमुक नेता कनिमोझी ने गुरुवार को दोहराया कि हालांकि कांग्रेस के साथ सीट-बंटवारे पर बातचीत चल रही है, लेकिन सीटों के आवंटन और संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने का काम इस उद्देश्य के लिए नियुक्त समिति पर छोड़ दिया जाएगा।
द्रमुक की उप महासचिव और पार्टी की संसदीय दल की नेता कनिमोझी ने गुरुवार को चेन्नई में पार्टी मुख्यालय 'अन्ना अरिवलयम' में पत्रकारों से कहा, "गठबंधन पर बातचीत चल रही है, लेकिन द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का प्रत्येक घटक कितनी सीटों और निर्वाचन क्षेत्रों पर चुनाव लड़ेगा, इसका निर्णय नेतृत्व द्वारा गठित पैनल द्वारा लिया जाएगा। वे ही संख्या की घोषणा करेंगे।"सुश्री कनिमोझी ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या कांग्रेस अपनी क्षमता से अधिक सीटों की मांग कर रही है। यह महत्वपूर्ण है कि जब कांग्रेस की ओर से सत्ता साझा करने की मांग उठी थी और पिछले नवंबर में गठित कांग्रेस सीट-बंटवारा समिति के प्रमुख गिरिश चोडनकर ने इसका समर्थन किया था। तब कनिमोझी को भी राहुल गांधी से बात करने के लिए भेजा गया था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित