लखनऊ , दिसम्बर 23 -- उत्तर प्रदेश के विद्यालयों और महाविद्यालयों में साफ-सफाई, विशेषकर महिला शौचालयों की दयनीय स्थिति का गंभीर मुद्दा मंगलवार को विधान परिषद में नियम-110 के अंतर्गत उठाया गया।

सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की गई कि राज्य भर में विशेष अभियान चलाकर स्कूल-कॉलेजों के शौचालयों को दुरुस्त कराया जाए और छात्राओं के लिए यथासंभव शैनेट्री नैपकीन की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने कहा कि प्रधानमंत्री के स्वच्छता मिशन को आगे बढ़ाने के लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में स्वच्छता अभियान गतिमान है, लेकिन इसके बावजूद कई विद्यालयों और महाविद्यालयों में गंदगी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इसका सीधा असर छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ रहा है।

पाठक ने कहा कि अनेक स्कूल-कॉलेजों में शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई स्थानों पर पानी, साबुन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। राजधानी लखनऊ में भी कई कॉलेजों के छात्र-छात्राएं मूलभूत आवश्यकताओं के लिए परेशान हैं। कहीं शौचालयों में दरवाजे नहीं हैं तो कहीं खिड़कियों में शीशे टूटे हुए हैं। ऐसी स्थिति में छात्राएं शौचालय के उपयोग से कतराती हैं, जो उनके स्वास्थ्य और सम्मान दोनों के लिए चिंताजनक है।

उन्होंने अपने वक्तव्य में राजधानी के आई.टी. गुरूनानक गर्ल्स पी.जी. कॉलेज सहित एक दर्जन से अधिक कॉलेजों का उल्लेख किया गया, जहां शौचालयों की स्थिति बद से बदतर बताई गई। इसके साथ ही गाजियाबाद, आजमगढ़, बरेली, जौनपुर और पीलीभीत जैसे जनपदों के विद्यालयों में भी समान हालात होने की जानकारी दी गई।

पाठक ने कहा कि शहरों के अधिकांश महिला विद्यालयों में शैनेट्री नैपकीन उपलब्ध नहीं हैं। जहां कुछ स्थानों पर पहले वेंडिंग मशीनें लगाई गई थीं, वहां से उन्हें भी हटा लिया गया है। यह स्थिति किशोरियों और छात्राओं के स्वास्थ्य के प्रति घोर लापरवाही को दर्शाती है।

उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार इस गंभीर विषय पर तत्काल संज्ञान लेते हुए विद्यालय-महाविद्यालयों में स्वच्छता, महिला शौचालयों की मरम्मत, नियमित सफाई और शैनेट्री नैपकीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान चलाए, ताकि छात्राओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके।

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