नयी दिल्ली , दिसंबर 18 -- जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओरांव ने गुरुवार को लोक सभा में बताया कि सरकार विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने को प्रतिबद्ध है।
श्री ओरांव ने प्रश्न काल में एक सवाल के जवाब में बताया कि जनजाति समुदाय के 20 विद्यार्थियों को अभी उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने पर आर्थिक सहायता दी जाती है। अभी ऐसे विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाकर 50 की जा रही है। जनजाति समुदाय के और भी विद्यार्थियों को विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए भेजने के प्रयास आगामी दिनों में किये जायेंगे।
उन्होंने बताया कि देश भर में 728 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल स्वीकृत हैं, जिनमें से 440 संचालित किये जा रहे हैं। शेष स्कूलों को जल्द शुरू करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे स्कूल खोलने के लिए कुछ मानक निर्धारित किये गये हैं, जिसमें किसी विकासख्ंड में आदिवासी समुदाय के लोगों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए, इसी के साथ ही ऐसे लोगों की संख्या 20 हजार से कम भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी विकासखंड में ये मानक पूरे होते हैं और वहां ऐसा स्कूल नहीं स्वीकृत हुआ है, तो संज्ञान में लाये जाने पर स्कूल स्वीकृत कर दिया जायेगा।
श्री ओरांव ने बताया कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत 63,000 से ज़्यादा आदिवासी बहुल गांवों को विकसित करने का लक्ष्य है। ये गांव 30 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 विकासखंडों में हैं। इन गांवों में अवसंरचना और कल्याणकारी योजनाओं काे लागू करना सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस अभियान का उद्देश्य पांच वर्षों में जनजातीय समुदायों का सर्वांगीण विकास करना है।
उन्होंने बताया कि उत्तरप्रदेश के श्रावस्ती और बलरामपुर जिलों में थारू जनजाति बहुल इलाकों में अध्यापकों और विद्यार्थियों के शौचालय के लिए राशि स्वीकृत कर दी गयी है। थारू जनजाति के कल्याण के लिए स्व सहायता समूह, आजीविका मिशन आदि योजनाओं-कार्यक्रमों के तहत सहायता पहुंचायी जा रही है।
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