नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- केंद्रीय वित्त मंत्रालय में वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू ने प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) को देश के आर्थिक सामाजिक इतिहास की सबसे परिवर्तनकारी पहलों में एक बताते हुए आज कहा कि इससे एक वित्तीय समावेशन क्रांति उत्पन्न हुई है जो लोगों की जिंदगी में बदलाव ला रही है।

श्री नागराजू ने यहां वित्तीय सेवा विभाग के तत्वावधान में वित्तीय समावेशन पर आयोजित दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन- ग्लोबल इंक्लूसिव फाइनेंस समिट' में कहा कि 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना का शुभारंभ "भारत के (आर्थिक सामाजिक) इतिहास की सबसे परिवर्तनकारी पहलों में एक है। इसस महत्वाकांक्षी वित्तीय समावेशन मुहिम ने सैकड़ों लाखों नागरिकों, खासकर महिलाओं और ग्रामीण आबादी के लिए आर्थिक परिदृश्य को मौलिक रूप से बदल दिया है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत 53 करोड़ से अधिक जनधन बैंक खाते खोले गए हैं। जनधन खातों में 72 प्रतिशत ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोगों के हैं। इस योजना ने समाज में स्त्री-पुरुष विषमता को दूर करने में भी भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि जन धन खातों में से 56 प्रतिशत महिलाओं के नाम हैं जिससे बैंक खाता स्वामित्व में स्त्री पुरुष के बीच अंतर प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है।

वित्तीय सेवा सचिव ने कहा , " संख्या के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जो बड़ा बदलाव यह आया है कि महिलाओं ने वास्तव में खुद को परिवार के आर्थिक विकास में समान हितधारक के रूप में देखना शुरू कर दिया है।....इसने महिलाओं को बहुत सशक्त बनाया है।"श्री नागराजू ने बताया कि इस समय पीएमजेडीवाई खातों में जमा राशि बढ़कर 2.29 लाख करोड़ रुपये हो गई है। उन्होंने इसे सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन बताया। इस कार्यक्रम में जमीनी स्तर पर काम कर रहे छह लाख बैंकिंग प्रतिनिधि (कॉरेस्पॉडेंट) जुड़े हैं।

उन्होंने डिजिटल लेनदेन में भारत की अग्रणी स्थिति का भी उल्लेख किया। दुनिया में हो रहे कुल रियल-टाइम भुगतान का आधा भारत करता है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से अरबों की संख्या में भुगतान हो रहे हैं। इस डिजिटल बुनियादी ढांचे का लाभ उठाकर पहले से वंचित आबादी तक कर्जऔर बीमा सुविधाओं का विस्तार किया गया है।

उन्होंने बताया कि सूक्षम उद्यमियों, शिल्पियों और कारोबार के लिए अलग अलग आकार की कर्ज सहायता की योजना-मुद्रा ऋण योजना के तहत, अप्रैल 2015 से अब तक लगभग 38 लाख करोड़ रुपये के कुल 56.32 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 67 प्रतिशत महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।

श्री नागराजू ने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने शुरुआती चरण में खोले गए खातों के केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) अद्यतन करने की , वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा उपायों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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