नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- वित्त मंत्रालय के आर्थिक मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि वित्तीय समावेशन कार्यक्रम की सफलता अंतत: इस बात पर निर्भर करती है कि उससे वास्तविक आर्थिक गतिविधियों को कितना बल और प्रोत्साहन मिल रहा है।

डॉ नागेश्वरन ने इस संबंध में रेहड़ी- खोमचे वालों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख किया जिसने कोविड महामारी से प्रभावित दौर में लोगों को अपनी अपनी रोजी-रोटी के माध्यम को संभालने और मजबूत करने में मदद की। वह एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज द्वारा वित्तीय सेवा विभाग के सहयोग से यहां समावेशी वित्त पर आयोजित दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन- ग्लोबल इनक्लूसिव फाइनांस समिट 2026 के एक सत्र को संबोधित कर रहे थे।

सम्मेलन के पहले दिन एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज की ओर से 'इंडिया इनक्लूसिव फाइनांस रिपोर्ट - 2025 'जारी की गयी।

डॉ नागेश्वरन ने आज इस सम्मेलन में इनक्लूसिव फाइनेंस इंडिया पुरस्कार वितरण सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा, " समावेशी वित्त सुविधा (कर्ज सुविधा) तभी सफल होती है जब यह असली आर्थिक गतिविधि को मज़बूत करती है - न कि जब यह अपने आप में एक मकसद बन जाती है।"उन्होंने कहा, " पीएम स्वनिधि योजना के तहत, महामारी के दौरान सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए गलियों में रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वालों ने कारोबार के लिए मिली पूंजी का इस्तेमाल न सिर्फ़ ज़िंदा रहने के लिए किया, बल्कि अपने कारोबार को बढ़ाने, ज़रूरी चीज़ों में निवेश करने, मुनाफ़ा बढ़ाने और अपने कारोबार को ज़्यादा मजबूत बनाने के लिए भी किया।"उन्होंने कहा, " समावेश का यही मतलब होना चाहिए: लोगों को कमज़ोरी से बाहर निकलने और सिर्फ़ गुज़ारा करने वाले व्यापार से ज़्यादा उत्पादक कामों की ओर बढ़ने में सक्षम बनाना।"इस सम्मेलन में विशेष रूप से इस बात पर चर्चाएं की गयी कि भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा को अब आगे कर्ज सुविधाओं के विस्तार से लेकर क्षमता, विश्वास और संस्थागत शक्ति को बढ़ाने की दिशा में कैसे विकसित होना चाहिए। सम्मेलन में वित्तीय क्षेत्र के नीति निर्माताओं, नियामकों, वित्तीय संस्थानों, वैश्विक विशेषज्ञों ने भाग लिया।

इस अवसर पर जारी इंडिया इनक्लूसिव फाइनेंस रिपोर्ट 2025 में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 में बैंक खाता रखने वाले लोगों का अनुपात स्वामित्व 78 प्रतिशत थो जो बढ़कर 2024 में 91 प्रतिशत हो गया। इस दौरान खाते का उपयोग 35 प्रतिशत से 69 प्रतिशत पर पहुंच गया। भारत जैसे अन्य देशों की तुलना में निष्क्रिय खातों का अनुपात अब भी ऊंचा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में अब भी केवल 23 प्रतिशत वयस्क ही आपातकालीन धन जुटाने में सक्षम हैं,यह वित्तीय समावेशन में लचीलेपन की कमी का संकेत है।

रिपोर्ट के अनुसार बचत के मामले में स्त्री-पुरूष का अंतर है। 2024 में महिलाओं की औपचारिक बचत 23 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि पुरुषों में यह 31 प्रतिशत थी। महिला-नेतृत्व वाले सूक्ष्म, लघु और मझोली (एमएसएमई) इकाइयों को लगभग 35 प्रतिशत कर्ज की कमी का सामना करना पड़ता है, जो पुरुष-स्वामित्व वाले उद्यमों की तुलना में लगभग दोगुना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एएएएमईयों की ऋण की कुल मांग 123,000 अरब रुपये है, जबकि औपचारिक माध्यमों से ऋण आपूर्ति 34,000 अरब रुपये है।

इसमें साइबर सुरक्षा की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 2024 में 36 लाख साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए गए, जिससे 228.45 अरब रूपये का नुकसान हुआ। साइबर धोखाधड़ी ने नये डिजिटल उपयोगकर्ताओं को असमान रूप से प्रभावित किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एमएसएमई के कर्ज पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में सुधार हुआ, मार्च 2025 में वसूल नहीं हो रही किस्तों का अनुपात घटकर 3.6 प्रतिशत रह गया।

पहल उद्यम असिस्ट के माध्यम से 2.77 करोड़ से अधिक अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक बनाया गया, जिससे चार करोड़ से अधिक व्यक्तियों को लाभ मिला।

एक्सेस डेवलपमेंट सर्विसेज़ के सीईओ विपिन शर्मा ने शिखर सम्मेलन के दौरान रिपोर्ट जारी इस रिपोर्ट के महत्व पर कहा, "जैसे ही भारत अपनी वित्तीय समावेशन यात्रा के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, हमारे सामने चुनौती अब पहुंच की नहीं है, बल्कि मुख्यधारा की वित्तीय प्रणाली का हिस्सा बनने से पिरामिड के निचले समुदायों को होने वाले ठोस लाभों की है। गहन वित्तीय समावेशन के विचार पर आधारित, ग्लोबल इन्क्लूसिव फाइनेंस समिट यह जांचने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है कि क्या हमारे फाइनेंशियल सिस्टम परिवारों और उद्यमों के लिए सच में क्षमता, लचीलापन और विश्वास को सक्षम बना रहे हैं।"सम्मेलन का उद्घाटन वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने किया । उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) को देश के आर्थिक सामाजिक इतिहास की सबसे परिवर्तनकारी पहलों में एक बताया। उन्होंने कहा कि इससे एक वित्तीय समावेशन क्रांति उत्पन्न हुई है जो लोगों की जिंदगी में बदलाव ला रही है।

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